भारत और दक्षिण कोरिया ने मिलाया हाथ, चिप और डिफेंस सहयोग पर जोर, जयशंकर के सियोल दौरे से टेंशन में बीजिंग
भारत और दक्षिण कोरिया ने संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है। दोनों देशों ने चिप और डिफेंस सहयोग बढ़ाने पर हामी भी भरी है। भारत और दक्षिण कोरिया चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इन दोनों देशों के बीच सहयोग से चीन की चिंता बढ़ने की आशंका है।
सियोल। विदेश मंत्री एस जयशंकर दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंन अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के साथ संबंध मजबूत करने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के अस्थिर अंतरराष्ट्रीय माहौल में समान मूल्यों और मजबूत आपसी भरोसे वाले देशों के लिए मिलकर काम करना जरूरी है। भारत और दक्षिण कोरिया दोनों चीन से खतरे का सामना कर रहे हैं। चीन, दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े दुश्मन उत्तर कोरिया का करीबी दोस्त और रणनीतिक साझेदार है। इस कारण भारत और दक्षिण कोरिया अपने संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
अपनी बातचीत के समय पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा, "और मैं आपसे सहमत हूं, मुझे लगता है कि हमारी यह मीटिंग बिल्कुल सही समय पर हो रही है। सही समय पर इसलिए क्योंकि हाल ही में राष्ट्रपति स्तर की यात्रा हुई है। और इसलिए भी क्योंकि दुनिया के मौजूदा हालात और इस थोड़ी मुश्किल दुनिया में हमारे रिश्तों की अहमियत बहुत ज्यादा है।" दोनों देशों के विदेश मंत्री इससे पहले न्यूयॉर्क, कुआलालंपुर, वाशिंगटन, जी7 विदेश मंत्रियों की मीटिंग और हाल ही में राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मिल चुके हैं। जयशंकर ने इस लंबे समय से चले आ रहे अच्छे तालमेल को मानते हुए कहा, "हां, हम हाल ही में मिले हैं, लेकिन मैं उन्हें लंबे समय से जानता हूं।"
जयशंकर ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा, ''सियोल वापस आकर और आज बातचीत के लिए आपसे तथा आपकी टीम से मिलकर बहुत प्रसन्नता हो रही है।'' उन्होंने कहा कि विश्व की मौजूदा स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को देखते हुए यह बैठक उचित समय पर हुई है। वार्ता में व्यापार, निवेश और वित्त के उन अहम क्षेत्रों में आगे की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया गया जिन पर अप्रैल में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान सहमति बनी थी।
जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि विदेश मंत्री होने के नाते संबंधों को आगे बढ़ाना और अधिक दूरदर्शी एवं वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप साझेदारी विकसित करना उनकी जिम्मेदारी है। जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए चो की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा, ''हमारे संबंधों की संभावनाओं को अभी पूरी तरह साकार किया जाना बाकी है और हम ऐसा करने के लिए पूरे प्रयास करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।''
सियोल में हुई यह बातचीत दोपहर के भोजन के दौरान भी जारी रही और करीब तीन घंटे तक चली। चो ने कहा कि राष्ट्रपति ली की अप्रैल में हुई भारत यात्रा कोरिया-भारत संबंधों को एक नए आयाम पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उन्होंने बैठक के बाद 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हम व्यापार, निवेश और वित्त जैसे क्षेत्रों में तेजी से हुई प्रगति का स्वागत करते हैं और हमने इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।''
चो ने भारत में इस सप्ताह आयोजित किए जा रहे ''कोरिया सप्ताह'' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में कोरियाई कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों का सीधे समाधान करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी की है। उन्होंने कहा, ''मैं भारत के मजबूत समर्थन के लिए आभारी हूं और कोरिया जल्द ही अपने यहां भारतीय कंपनियों के लिए इसी तरह की वार्ता की मेजबानी करेगा।'' चो ने कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों ने तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा की और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम से उत्पन्न आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।