10 साल से निष्क्रिय खातों के ₹240.86 करोड़ लौटाने की पहल, आगरा में 14 नवम्बर को बैंक समाधान शिविर

आगरा। 14 नवम्बर को मंडलायुक्त सभागार, आगरा में “बैंक समाधान शिविर” का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में कुल 22 राष्ट्रीयकृत बैंकों के समाधान स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से पिछले 10 वर्षों से निष्क्रिय खातों का निस्तारण किया जाएगा। यह जानकारी केनरा बैंक के एलडीएम ऋषिकेश बनर्जी ने दी है। यह पहल डीएफएस (वित्तीय सेवा विभाग), वित्त मंत्रालय भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देश पर हो रही है।

Nov 12, 2025 - 18:48
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10 साल से निष्क्रिय खातों के ₹240.86 करोड़ लौटाने की पहल, आगरा में 14 नवम्बर को बैंक समाधान शिविर
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आगरा।  14 नवम्बर को मंडलायुक्त सभागार, आगरा में “बैंक समाधान शिविर” का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में कुल 22 राष्ट्रीयकृत बैंकों के समाधान स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से पिछले 10 वर्षों से निष्क्रिय खातों का निस्तारण किया जाएगा। यह जानकारी केनरा बैंक के एलडीएम ऋषिकेश बनर्जी ने दी है। यह पहल  डीएफएस (वित्तीय सेवा विभाग), वित्त मंत्रालय भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देश पर हो रही है।  

एलडीएम ने बताया कि इस पहल के तहत 7.82 लाख निष्क्रिय खातों में पड़ी ₹240.86 करोड़ की डंप राशि का समाधान किया जाएगा, जिससे हजारों खाताधारकों को लाभ मिलेगा। इस अभियान में एसबीआई, पीएनबी, इंडियन बैंक लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक समेत कुल 22 बैंक भाग लेंगे। इन बैंकों के स्टॉल पर खाताधारकों को उनके निष्क्रिय खातों से जुड़ी राशि की जानकारी, समाधान फॉर्म और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रक्रिया इस प्रकार होगी

प्रत्येक बैंक प्रतिनिधि खाताधारकों को डेफ क्लेम फॉर्म  प्रदान करेंगे। आरबीआई पोर्टल पर खाताधारक का विवरण सत्यापित किया जाएगा। सत्यापन के बाद खाताधारक को फॉर्म भरते समय आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट साइज फोटो और पासबुक की प्रति  जमा करनी होगी। सभी दस्तावेजों के साथ आवेदन आरबीआई मुख्यालय भेजा जाएगा। 10 से 15 दिनों के भीतर संबंधित खाताधारक के खाते में डंप राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।

एलडीएम बनर्जी ने बताया कि यह शिविर नागरिकों के भूले-बिसरे खातों में पड़ी रकम वापस दिलाने का बड़ा प्रयास है और सरकार की वित्तीय साक्षरता एवं पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।