इनर रिंग रोड लैंड पार्सलः मुख्य सचिव की नाराजगी के बाद एडीए ने लिया यू टर्न  

आगरा। एत्मादपुर तहसील के दर्जन भर गांवों के किसानों की लगभग 15 वर्ष पहले अधिग्रहीत की गई 444 हेक्टेयर जमीन को पहले किसानों को वापस लौटाने और फिर इस जमीन को अपने पास ही रखने का एडीए का फैसला यूं ही नहीं हुआ है। एडीए ने अपने ही पहले प्रस्ताव से यू टर्न क्यों लिया, यह हर किसी को चौंका रहा है। जानकार सूत्रों की मानें तो शासन स्तर से जताई गई नाराजगी के बात एडीए को यू टर्न लेना पड़ा है। 

Jan 10, 2025 - 16:03
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इनर रिंग रोड लैंड पार्सलः मुख्य सचिव की नाराजगी के बाद एडीए ने लिया यू टर्न   

जमीन अधिग्रहण के लगभग 15 साल बाद भी मुआवजा न मिलने पर दर्जन भर गांवों के सैकड़ों किसानों ने विगत 30 दिसंबर को इनर रिंग रोड की एक लेने को घेरकर धऱना शुरू कर दिया था। दूसरे दिन इन किसानों ने इनर रिंग रोड की दूसरी लेन की घेर ली थी, जिससे यमुना एक्सप्रेस से आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे को जोड़ने वाला यह मार्ग अवरुद्ध हो गया था। 

प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे। डीएम से लेकर तमाम अधिकारी किसानों को मनाने पहुंचे, लेकिन किसान एक ही जिद पकड़े रहे कि उनकी मुख्यमंत्री से बात कराओ। अंततः क्षेत्रीय विधायक डॊ. धर्म पाल सिंह के प्रयासों से किसानो की मुखयमंत्री से मुलाकात हुई थी।

मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रतिनिधियों से कहा था कि 99 प्रतिशत उनकी जमीन वापस लौटा दी जाएगी। एक प्रतिशत अगर कोई कानूनी पेंच फंसा तो उन्होंने ऐसा मुआवजा दिया जाएगा कि वे खुशी-खुशी अपनी जमीन छोड़ देंगे। सीएम के इस आश्वासन के बाद अधिकारी खुशी-खुशी लौटे थे और इनर रिंग रोड से धऱना समाप्त कर दिया गया था।

एडीए बोर्ड की आपात बैठक में तय हुआ चार गुना मुआवजा

इधर इस जमीन का अधिग्रहण करने वाले आगरा विकास प्राधिकरण की आपात बोर्ड बैठक बुलाकर रहनकलां समेत अन्य गांवों की अधिग्रहीत भूमि न लौटाने का निर्णय लेकर यह भी तय किया गया कि किसानों को जमीन का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। बोर्ड ने इनर रिंग रोड लैंड पार्सल के किसानों को मुआवजे की राशि पौन पांच सौ करोड़ रुपये तय की है। इसमें 273 करोड़ रुपये अधिग्रहीत भूमि का मूल मुआवजा होगा जबकि 202 करोड़ रुपये अधिग्रहण के समय से अब तक की ब्याज के होंगे।

एडीए ने किसानों की जमीन का अधिग्रहण 2009-10 में किया था जबकि इसका मुआवजा 2017 की सर्किल रेट से चार गुना तय किया गया है। हालांकि एडीए बोर्ड का यह ताजा निर्णय सामने आने के बाद संबंधित किसान यह मुआवजा स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। वे अपनी जमीन वापस चाहते हैं।

शासन स्तर से होगा एडीए बोर्ड के प्रस्ताव पर फैसला

एडीए बोर्ड ने इस जमीन को अपने पास रखने के लिए चार गुना मुआवजा देने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज दिया है। अब इस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर से ही होगा। सूत्रों की मानें तो इस पर कैबिनेट की बैठक में विचार होगा। शासन ही तय करेगा कि किसानों की जमीन लौटानी है या रखनी है।

शासन ने जताई थी नाराजगी

एडीए बोर्ड ने पहले इस जमीन को किसानों को वापस लौटाने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज दिया था। तब शासन में किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया था। अब जबकि किसानों ने धरना शुरू किया तो शासन स्तर पर खलबली मची। फाइलें निकाली गईं तो एडीए बोर्ड के इस प्रस्ताव का पता चला। मुख्य सचिव स्वयं इस मामले को देख रहे थे।

एडीए अधिकारियों को किया गया था तलब

शासन स्तर से इस बारे में आगरा विकास प्राधिकरण से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों को लखनऊ तलब कर लिया गया था। मुख्य सचिव एडीए बोर्ड के जमीन वापसी के प्रस्ताव से बहुत नाराज थे। एक अधिकारी पर तो गाज गिराने की तैयारी हो गई थी, लेकिन शासन स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें किसी तरह बचा लिया। इसके बाद इनसे भी वरिष्ठ अधिकारी को बुलाकर नाराजगी जताई गई कि बोर्ड से यह प्रस्ताव पास हुआ तो कैसे हुआ।

अधिग्रहण के बाद भी मुआवजा न मिलने पर अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं। एडीए के अधिकारी पहले कह रहे थे कि उन्होंने जमीन वापस लौटाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, फैसला वहीं से होना है। अब एडीए के इऩ्हीं अधिकारियों को अपने पुराने प्रस्ताव के विपरीत नया प्रस्ताव शासन को भेजना पड़ा है।

SP_Singh AURGURU Editor