आगरा के डीएम-सीडीओ ओर नगरायुक्त के खिलाफ कोर्ट को रिपोर्ट भेजने वाला दरोगा निलंबित
आगरा। आगरा कमिश्नरेट में एक चौंकाने वाली कार्रवाई ने पुलिस महकमे और प्रशासन दोनों में खलबली मचा दी है। दरअसल, जगदीशपुरा थाने में तैनात दारोगा देवी शरण सिंह द्वारा सीजेएम कोर्ट को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर आगरा के डीएम, सीडीओ और नगर आयुक्त कानून के घेरे में आ गए। इससे प्रशासनिक ही नहीं पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई। आनन-फानन में इस दरोगा को निलंबित कर दिया गया है।
मामला इस प्रकार है। शहर के बोदला–बिचपुरी रोड पर महीनों से पड़ी सिल्ट और मलबे के मुद्दे पर सत्यमेव जयते ट्रस्ट की ओर से तीन जून को आगरा के पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी, सीडीओ प्रतिभा सिंह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। यहां से कोई कार्रवाई न होने पर सत्यमेव जयते ने आगरा के सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर कर यही मांग की। कोर्ट ने इस प्रार्थना पत्र पर जगदीशपुरा पुलिस से रिपोर्ट मांगी। दरोगा देवीशरण सिंह ने शिकायत में वर्णित तथ्यों को सही मानते हुए कोर्ट को अपनी रिपोर्ट भेज दी। हालांकि दरोगा की ओर से शिकायत में उठाये गये बिंदुओं पर ही रिपोर्ट दी गई है, लेकिन इस मामले में डीएम, सीडीओ और नगरायुक्त के खिलाफ मुकदमे की मांग की गई है, इसलिए माना जा रहा है कि तीनों अधिकारी कानून के घेरे में आ सकते हैं।
दरोगा देवी शरण सिंह का निलंबन डीसीपी के स्तर से किया गया है। निलंबन की वजह कार्य में लापरवाही बताया गया है, जबकि असलियत में यह मामला आगरा के तीन सर्वोच्च पदों पर काबिज आईएएस अधिकारियों- जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और नगर आयुक्त के खिलाफ भेजी गई रिपोर्ट से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। शुक्रवार को जैसे ही दरोगा की रिपोर्ट के बारे में पता चला, प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। एक साहब की जूम मीटिंग में इस दरोगा को लेकर कड़ी नाराजगी जताई गई, जिसकी चर्चा विभाग में जंगल की आग की तरह फैल गई।
मामला सड़क, सिल्ट और खतरनाक हालात का
बोदला–बिचपुरी रोड पर सिल्ट, कीचड़ और मलबा जमा है, जिससे राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो गया। ट्रस्ट का कहना है कि यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य और यातायात दोनों के लिए खतरा है और आवश्यक बजट व अधिकार होते हुए भी सफाई नहीं कराई गई।
शिकायत से अदालत तक: तिथियां और दस्तावेज
-3 जून: सत्यमेव जयते ट्रस्ट ने पुलिस आयुक्त से अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
-21 जुलाई: कार्रवाई न होने पर ट्रस्ट अध्यक्ष मुकेश जैन ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
-याचिका में डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी, सीडीओ प्रतिभा सिंह, नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल सहित अन्य को आरोपित बनाया गया।
-ट्रस्ट ने वीडियो/फोटो साक्ष्य होने का दावा किया और निष्क्रियता को लोकसेवक के पद का दुरुपयोग तथा जनता के विश्वास का आपराधिक उल्लंघन बताया, जो बीएनएस धारा 316(5) के तहत दंडनीय बताया गया।
-अदालत ने थाना जगदीशपुरा से आख्या तलब की।
दरोगा की जांच रिपोर्ट: आरोप सही
29 जुलाई को तैनात दरोगा देवी शरण सिंह ने अदालत को रिपोर्ट भेजी जांच में इस बात की पुष्टि की कि बोदला से बिचपुरी तक सड़क पर मलबा, कीचड़ और सिल्ट जमा है और लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
निलंबन आदेश: आधिकारिक वजह और बड़ा सवाल
डीसीपी ने दरोगा देवी शरण सिंह को निलंबित कर दिया। कागज़ों में वजह कार्य में लापरवाही दर्ज है, लेकिन गलियों में चर्चा यही है कि क्या अदालत को सही रिपोर्ट भेजना दरोगा के लिए इनाम साबित हुआ या सजा?