बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज किया था, उपभोक्ता आयोग ने दिए 2.54 करोड़ रुपये अदा करने का आदेश

आगरा। शाहदरा स्थित कृष्णा विहार कॉलोनी में संचालित सुनील प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के मालिक सुनील कुमार गर्ग को आखिरकार न्याय मिल गया। ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा गलत आधार पर फायर क्लेम खारिज किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, द्वितीय आगरा ने बीमा कंपनी को 2,54,37,595 रुपये का भुगतान करने का आदेश सुनाया है।

Jul 2, 2025 - 19:34
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बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज किया था, उपभोक्ता आयोग ने दिए 2.54 करोड़ रुपये अदा करने का आदेश

-सुनील प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के मालिक को मिला न्याय, आग में स्वाहा हुई फैक्ट्री का क्लेम बीमा कंपनी ने गोदाम बताकर खारिज कर दिया था

यह मामला 25 सितंबर 2019 को तड़के करीब चार बजे फैक्ट्री में लगी भीषण आग से जुड़ा है। आग इतनी विकराल थी कि उसे बुझाने के लिए आगरा, फिरोजाबाद और मथुरा से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को बुलाना पड़ा। फैक्ट्री में रखा कच्चा माल, मशीनरी, तैयार माल और अन्य सामग्री जलकर खाक हो गई। फैक्ट्री मालिक सुनील कुमार गर्ग ने तुरंत ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी को आग लगने की सूचना दी।

बीमा कंपनी ने किया क्लेम खारिज

सुनील गर्ग ने पहले ही फायर एंड स्पेशल पैरिल्स पॉलिसी के तहत 75,331 रुपये का प्रीमियम अदा कर बीमा करवाया था। लेकिन आग की घटना के बाद जब उन्होंने क्लेम किया तो ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि जिस हिस्से में क्षति हुई वह गोदाम है, जो पॉलिसी में कवर नहीं है। सर्वेयर ने भी बीमा कंपनी की इस बात को आधार बनाकर क्लेम को नॉन-क्लेम घोषित कर दिया।

आयोग ने माना- फैक्ट्री और गोदाम नहीं अलग

परिवादी सुनील गर्ग ने जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय में बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज की। आयोग के अध्यक्ष आशुतोष और सदस्य सुश्री पारुल कौशिक ने दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर यह पाया कि बीमा कंपनी जानबूझकर फैक्ट्री को गोदाम घोषित करने का प्रयास कर रही है, जबकि पूरी निर्माण इकाई एक कॉम्पैक्ट, इंटरकनेक्टेड यूनिट है। साथ ही बीमा पॉलिसी में लोकेशन संबंधित त्रुटियों को सेवा में कमी माना गया।

30 दिन में करें भुगतान, वरना लगेगा ब्याज

आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आदेश की तिथि से 30 दिन के भीतर 2,54,37,595 रुपये का भुगतान परिवादी को करे। यदि कंपनी इस अवधि में भुगतान नहीं करती है तो उसे आदेश की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी अतिरिक्त रूप से देना होगा।

SP_Singh AURGURU Editor