आंबेडकर विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श, ब्रजभाषा काव्य से सजी सांध्य वेला

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ में आयोजित द्विसाप्ताहिक अंतरविषयी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के अंतर्गत आज का दिन ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : कल, आज और कल’ विषय को समर्पित रहा। कार्यक्रम स्थल सूर कक्ष में आयोजित इन शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों ने भारतीय दर्शन, नैतिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के विविध पहलुओं को उजागर किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. प्रदीप श्रीधर (निदेशक, हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ) द्वारा स्वागत भाषण और अतिथि अभिनंदन के साथ हुआ।

Jul 30, 2025 - 18:54
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आंबेडकर विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श, ब्रजभाषा काव्य से सजी सांध्य वेला
डॊ. आंबेडकर विवि के केएम इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यशाला में मंचस्थ अतिथि वक्ता एवं मौजूद छात्र।

मुख्य अतिथि प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव (इग्नू, नई दिल्ली) ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि वास्तविक ज्ञान वही है जो अंतःकरण को प्रकाशित करे। भारतीय परंपरा में सदा सामूहिक कल्याण की भावना प्रधान रही है। डॉ. छगनलाल शर्मा (अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, आर.बी.एस. कॉलेज, आगरा) ने कहा, भारत अज्ञान से ज्ञान की ओर गतिशील संस्कृति है। अंतर्दृष्टि का विकास ही ज्ञान परंपरा का मूल है।

प्रो. पूनम सिंह (प्राचार्य, बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय), ने अध्यक्षीय वक्तव्य में जोर दिया, 2047 तक हमें अपनी पारंपरिक ज्ञान-संरचना को शिक्षा व्यवस्था में पुनर्स्थापित करना ही भारत@100 का आधार बनेगा। प्रो. संजीव श्रीवास्तव (अध्यक्ष, हिंदी विभाग, के.आर.पी.जी. कॉलेज, मथुरा) ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण है, जिसकी जड़ें ऋग्वेद से लेकर आधुनिक चेतना तक फैली हुई हैं। डॉ. हिमांशु तिवारी (हिंदी विभाग, आर.पी.जी. कॉलेज, मथुरा) ने भारतीय ज्ञान को नैतिक चेतना और मानवतावाद का शाश्वत प्रतीक बताया।

सांध्य सत्र: ब्रजभाषा काव्य मंच का रसोत्सव

कार्यशाला के सांस्कृतिक आयाम में ‘ब्रजभाषा काव्य मंच’ द्वारा भावपूर्ण कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें कवियों ने भारतीय संस्कृति, यथार्थ और समकालीन चिंतन को काव्य के माध्यम से स्वर दिए। कविता पाठ करने वालों में डॉ. ब्रजबिहारी 'बिरजू', डॉ. राजीव शर्मा 'निस्पृह', योगेश शर्मा 'योगी', डॉ. रामेन्द्र शर्मा 'रवि', डॉ. केशव कुमार शर्मा, डॉ. रमा 'रश्मि', वीरेंद्र पाठक, योगेंद्र शर्मा आदि प्रमुख थे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहिनी दयाल एवं डॉ. रामेन्द्र शर्मा 'रवि' ने किया। कवियों की रचनाओं ने छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों को गहरे तक आंदोलित किया।

विद्यार्थियों संग प्राध्यापक भी मौजूद रहे

कार्यशाला में विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यापीठ के समस्त प्राध्यापकगण की गरिमामयी उपस्थिति रही। विमर्श, विचार और कविता के इस त्रिवेणी संगम ने भारतीय ज्ञान परंपरा की सतत यात्रा को वर्तमान संदर्भों में पुनर्परिभाषित करने का सशक्त प्रयास किया।

SP_Singh AURGURU Editor