15 साल पुराने वाहनों को भारी शुल्क लेकर चलने की अनुमति समझ से परे, क्या यह कमाई का जरिया?

आगरा। केंद्र सरकार ने पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए उनकी वैधता 20 साल तक बढ़ा दी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए नया नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है, लेकिन इस राहत के साथ भारी भरकम शुल्क भी जोड़े जाने से वाहन मालिकों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं।

Aug 23, 2025 - 12:33
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15 साल पुराने वाहनों को भारी शुल्क लेकर चलने की अनुमति समझ से परे, क्या यह कमाई का जरिया?

-सवाल ये है कि 15 साल पुराने वाहन प्रदूषण करते हैं तो भारी शुल्क लेकर फिर से रजिस्ट्रेशन कराने से प्रदूषण कम हो जाएगा?

सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की नई दरें इस प्रकार हैं- इनवैलिड कैरिज : 100 रुपये, मोटरसाइकिल 2,000 रुपये, थ्री-व्हीलर/क्वाड्रिसाइकिल : 5,000 रुपये, लाइट मोटर व्हीकल (कार आदि) : 10,000 रुपये, इंपोर्टेड मोटर वाहन (2 या 3 पहिया) : 20,000 रुपये, इंपोर्टेड मोटर वाहन (4 या अधिक पहिया) : 80,000 रुपये, अन्य वाहन : 12,000 रुपये।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन दरों पर जीएसटी अलग से लागू होगा। यानी अंतिम खर्च और ज्यादा बढ़ेगा।

सवाल खड़े कर रही है नीति

सरकार का तर्क है कि 15 साल पुराने वाहन प्रदूषण और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक होते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ भारी-भरकम शुल्क वसूलकर नया रजिस्ट्रेशन करने से पुराने वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम हो जाएगा?

जब सरकार खुद यह मानती है कि 15 साल पुराने वाहन प्रदूषण के लिहाज से निष्प्रयोज्य हैं, तो फिर 20 साल तक उनकी रजिस्ट्रेशन वैधता क्यों दी जा रही है? इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि वाहन कोई भी हो, अगर उसकी प्रॊपर मेंटीनेंस हो तो 15 तो क्या 25 साल तक भी चल सकता है। ऐसे में 15 साल में वाहनों को हटाने की नीति क्या ओटोमोबाइल सेक्टर के दबाव में लाई गई थी। सही बात तो यह है कि एक आम परिवार के लिए गाड़ी खरीदना एक सपने के पूरे होने जैसा होता है। ये परिवार यदा-कदा ही अपनी गाडियों को चलाते हैं। 15 साल में उनकी गाड़ियां बहुत कम चल पाती हैं। 15 साल में गाड़ी को कंडम घोषित करने की नीति ऐसे परिवारों पर कुठाराघात की तरह होती है।

ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि भारी शुल्क लेकर 15 साल पुरानी गाड़ी का फिर से रजिस्ट्रेशन करना और फिर अगले पांच साल तक चलने की अनुमति देना क्या वास्तव में पर्यावरण सुधार के लिए है या फिर सरकार के राजस्व बढ़ाने का नया तरीका? लोक स्वर के अध्यक्ष और व्यवसायी राजीव गुप्ता कहते हैं कि सरकार का यह नया आदेश हजम नहीं हो रहा। क्या बढ़ा शुल्क वसूलने से प्रदूषण कम हो जाएगा।

दिल्ली-एनसीआर में कोई राहत नहीं

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को इस नियम में कोई राहत नहीं दी गई है। यहां पहले से ही पुराने वाहनों पर कड़ा प्रतिबंध लागू है। राजधानी क्षेत्र में पेट्रोल के 15 साल और डीजल के 10 साल से अधिक पुराने वाहन सड़कों पर नहीं चल सकते।

वाहन मालिकों का कहना है कि सरकार की यह नीति विरोधाभासी है। यदि प्रदूषण का हवाला देकर पुराने वाहनों को रोका जा रहा है, तो फिर दोबारा रजिस्ट्रेशन कर भारी शुल्क लेकर उन्हें 20 साल तक चलाने की अनुमति कैसे दी जा रही है? यह नीति प्रदूषण नियंत्रण से ज्यादा राजस्व कमाने की कोशिश लग रही है।

SP_Singh AURGURU Editor