जयशंकर ने यूएस को खूब सुनाया, बोले- बड़ी ताकतें बदलती हकीकत को स्वीकार नहीं कर पातीं,  संतुलित वैश्विक व्यवस्था पर जोर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और चीन को ग्लोबल इकोनॉमिक कॉम्पिटिशन को "जीरो-सम गेम" के तौर पर देखने को लेकर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि स्थापित ताकतों को अब उभरती ताकतों के साथ तालमेल बैठाने में दिक्कतें आ रही हैं। इस दौरान जयशंकर ने वसुधैव कुटुंबकम का भी जिक्र किया।

Jun 25, 2026 - 21:50
 0
जयशंकर ने यूएस को खूब सुनाया, बोले- बड़ी ताकतें बदलती हकीकत को स्वीकार नहीं कर पातीं,  संतुलित वैश्विक व्यवस्था पर जोर

सियोल। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका का नाम लिए बिना जमकर निशाना साधा। उन्होंने देशों के बीच ग्लोबल इकोनॉमिक कॉम्पिटिशन को "जीरो-सम गेम" (एक की जीत, दूसरे की हार) के तौर पर देखने की बढ़ती आदत के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ स्थापित ताकतों को बदलती वैश्विक हकीकत के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किल हो रही है। उनका निशाना सीधे तौर पर अमेरिका की ओर था, जिसने न केवल भारत के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं, बल्कि ईरान पर हमला कर पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।

दक्षिण कोरिया के जेजू में 'शांति और समृद्धि के लिए 21वें जेजू फोरम' में मुख्य भाषण देते हुए जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा समृद्धि के विचार के लिए एक चुनौती है। जयशंकर ने कहा, "कुछ स्थापित ताकतों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता (कॉम्पिटिटिवनेस) खोने को स्वीकार करने में मुश्किल होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था एक 'जीरो-सम गेम' बन जाती है।" उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत का जिक्र किया, जिसका मतलब पूरी दुनिया एक परिवार है।

जयशंकर ने कहा, "भारत में हम जानते हैं कि पारंपरिक रूप से 'वसुधैव कुटुंबकम' के तहत दुनिया एक परिवार है। आज हमारे आस-पास जो उथल-पुथल दिख रही है, उसका एक बड़ा कारण यह है कि समाज में कुछ ताकतें इसी विश्वास को चुनौती दे रही हैं।" उन्होंने बार-बार अधिक संतुलित और मल्टीपोलर वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय फैसलों को आकार देने में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बड़ी भूमिका होनी चाहिए, जिसे दुनिया वैश्विक दक्षिण या ग्लोबल साउथ का नाम देती है।

भारत और अमेरिका के संबंधों में लंबे समय से तनाव है। यह तनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में काफी ज्यादा बढ़ा है। ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और बाद रूसी तेल खरीद के कारण टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया, जो दुनिया में सबसे ज्यादा था। बाद में ट्रेड डील पर बातचीत शुरू होने के बाद इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया। ट्रंप लगातार पाकिस्तान की पैरोकारी कर रहे हैं और उसके कुख्यात सेना प्रमुख असीम मुनीर को अपना फेवरेट फील्ड मार्शल बता रहे हैं।