जनकपुरी महोत्सवः मंच की परम्परा तो राजा दशरथ स्वरूप ने ही तोड़ी थी, यहीं से उठा विवाद
आगरा। कमला नगर में आयोजित श्रीजनकपुरी महोत्सव में राजा दशरथ स्वरूप अजय अग्रवाल की बड़हार दावत में गैरहाजिरी के बाद उठे विवाद में नई-नई बातें सामने आ रही हैं। अब एक बात यह सामने आ रही है कि 18 सितम्बर की रात जनक मंच पर राजा दशरथ स्वरूप अपने अजय अग्रवाल अपने परिवार के 10-12 लोगों को लेकर मंच पर चढ़ गये थे। यही नहीं, उनके साथ उनका एक बाउंसर और बंदूकधारी सुरक्षाकर्मी भी मंच पर चढ़ गये, जो कि जूते पहने हुए थे। इसी बात पर जनकपुरी कमेटी ने आपत्ति उठाई थी।
18 सितम्बर को सुबह राम बरात जनकपुरी में पहुंची थी। शाम के समय प्रभु श्रीराम और माता जानकी समेत अन्य स्वरूपों को मंच पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देने थे। इसी शाम को राजा दशरथ स्वरूप अजय अग्रवाल अपने परिवार के सदस्यों के साथ जनकपुरी पहुंचे। वे अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ सीधे मंच पर चढ़ गये। इस पर जनकपुरी कमेटी के एक पदाधिकारी ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि मंच पर केवल स्वरूप विराजमान रहते हैं। राजा दशरथ परिवार के साथ उनके सुरक्षाकर्मी भी बंदूक लेकर मंच पर जा पहुंचे थे। आरोप लगाया जा रहा है कि एक सुरक्षाकर्मी जूते पहने हुए था।
जनकपुरी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने राजा दशरथ स्वरूप अजय अग्रवाल से कहा कि अपने परिवार के लोगों को नीचे बैठायें। इस पर अजय अग्रवाल का कहना था कि उनके बहू बेटे व अन्य परिजन लंदन से आए हैं। इन्हें बैठने दिया जाए। यह बहस चल ही रही थी कि जनकपुरी कमेटी के एक पदाधिकारी ने राजा जनक स्वरूप राजेश अग्रवाल के परिवार के सदस्यों को भी मंच पर चढ़ा लिया। इसके बाद मंच पर असहज स्थिति पैदा हो गई। खैर किसी तरह से दोनों ही परिवारों के स्वरूपों से अतिरिक्त सदस्यों को मंच से उतारकर अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया।
हालांकि इस सारे प्रकरण में यह बात भी गौर करने की है कि राजा दशरथ स्वरूप जब अपने परिवार के सदस्यों के साथ जब जनकपुरी में पहुंचे थे और मंच पर चढ़ रहे थे, उसी समय मंच की व्यवस्थाएं देखने वालों ने उन्हें क्यों नहीं रोका। शायद अजय अग्रवाल को यह जानकारी न रही हो कि मंच पर बैठने के लिए कौन अधिकृत है और कौन नहीं।
विवाद की स्थिति इसके बाद भी बनी रही क्योंकि राजा दशरथ स्वरूप अजय अग्रवाल को मंच पर उनके लिए निर्धारित स्थान पर बैठने का मौका नहीं मिल सका था। उस जगह पर राजा जनक स्वरूप राजेश अग्रवाल बैठ गये थे। राजा दशरथ स्वरूप मंच पर जहां बैठे थे, वहां उनकी सीट के सामने खंभा था, जो उन्हें ढंके हुए था। शायद इसी वजह से राजा दशरथ स्वरूप ने अपने अपमान की पीड़ा बड़हार की दावत में न पहुंचने की वजह बताते हुए व्यक्त की।
यह रहती है जनकपुरी में मंच की व्यवस्था
आगरा में श्रीजनकपुरी महोत्सव में परम्परा के अनुसार मुख्य मंच पर प्रभु श्रीराम और उनके अनुजों तथा माता जानकी के अलावा उनकी बहनों के स्वरूप विराजमान रहते हैं। इन आठ स्वरूपों के अलावा गुरु वशिष्ठ स्वरूप को भी मंच पर बैठने की जगह मिलती है। मुख्य मंच से दो ढाई फुट नीचे दूसरा मंच होता है, जिस पर राजा दशरथ-रानी कौशल्या और राजा जनक-रानी सुनयना आदि के स्वरूप विराजमान रहते हैं।
मंच संचालक के हाथ में होती हैं व्यवस्थाएं
आगरा में होने वाले श्रीजनकपुरी महोत्सव में अब मंच संचालन का दायित्व रमन अग्रवाल निभाते रहे हैं। रमन अग्रवाल को मालूम रहता है कि मुख्य मंच पर किन्हें विराजमान होना है और नीचे के मंच पर किन स्वरूपों को बैठाना है। कमला नगर की जनकपुरी भी दो मंच बने थे। मुख्य मंच पर तो निर्धारित स्वरूप ही थे, लेकिन नीचे के मंच पर राजा दशरथ अपने परिवार के दूसरे सदस्यों को ले आए थे, यहीं से विवाद की स्थिति बनी। चूंकि इस बार मंच संचालन नये लोगों के हाथों में था, इसलिए उन्हें शायद परम्पराओं की जानकारी नहीं थी और राजा दशरथ बेरोकटोक नीचे वाले मंच पर परिवार के सदस्यों के साथ जा पहुंचे।