खंदौली का आनंद प्रकरणः दोनों पक्षों में समझौता पर भाजपा के भीतर की स्थिति उजागर कर गया यह मामला
आगरा। भाजपा महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष उपमा गुप्ता और उनके साथ मौजूद महिलाओं द्वारा विगत 13 जुलाई को खंदौली के रामनगर में पार्टी के ही बूथ अध्यक्ष आनंद शर्मा के साथ उसी के घर में की गई मारपीट की घटना में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। मामला जितना गंभीर था, उतनी ही तेजी से इसे ठंडे बस्ते में डालने की पटकथा लिखी गई। घटना की शुरुआत एक कथित न्यूड वीडियो भेजने के आरोप से हुई थी, लेकिन मामला सोशल मीडिया पर मारपीट के लाइव वीडियो के चलते राजनीतिक रंग ले बैठा था।
-मामले में जो नई-नई जानकारियां सामने आने लगी थीं, उससे पार्टी की साख पर बट्टा लगने लगा था
-मामला कानून की चौखट तक जाता तो दोनों पक्ष फंसते, इसलिए समझौता करने में ही भलाई समझी गई
मामला यह था कि महिला मोर्चा की एक सदस्य ने आरोप लगाया था कि आनंद शर्मा ने उनके मोबाइल पर न्यूड वीडियो भेजा है। इसके जवाब में आनंद शर्मा का कहना था कि उसके मोबाइल से किसी और ने यह हरकत की है। वीडियो को लेकर विवाद इस कदर बढ़ा कि 13 जुलाई को उपमा गुप्ता और उनके साथ की महिलाएं आनंद शर्मा के घर पहुंच गईं और वहां उससे जमकर मारपीट की। इस पूरी घटना को सोशल मीडिया पर लाइव कर दिया गया।
वायरल वीडियो ने उभारा विवाद, दोनों गुट बैकफुट पर
महिलाओं द्वारा आनंद को पीटे जाने की घटना के वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो पार्टी की छवि दांव पर लग गई थी। घटना के बाद आनंद शर्मा घर गायब हो गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया। इसके बाद उपमा गुप्ता और उनके साथ की महिलाएं भी बैकफुट पर आ गई थीं। आनंद शर्मा की पत्नी ने यह कहकर मामले को और गंभीर मोड़ दे दिया था कि अगर उनके पति को कुछ हुआ तो मारपीट करने वाली महिलाएं जिम्मेदार होंगी।
कल आनंद के घर पहुंचे थे क्षेत्रीय विधायक
कई दिन तक आनंद शर्मा के लापता रहने के बाद भाजपा के क्षेत्रीय विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह कल खुद उसके घर पहुंचे। उनकी मौजूदगी के बाद ही आनंद शर्मा सामने आया। इससे यह संकेत मिले कि पार्टी किसी भी तरह मामले को खत्म कराना चाहती है। हालांकि विधायक तो आनंद से मिलने के बाद लौट गये थे, लेकिन शाम होते-होते यह विवाद समझौते की शक्ल लेने लगा।
चाणक्य सेना ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
कल रात खंदौली स्थित एक मैरिज होम में चाणक्य सेना के पवन समाधिया ने दोनों पक्षों की बैठक करवाई। इस बैठक में आनंद शर्मा, उपमा गुप्ता, रेखा शर्मा, शिखा और अन्य लोग शामिल हुए। दोनों पक्षों ने समाज के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में समझौता किया। इस समझौते में स्पष्ट किया गया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मामले को समाप्त कर रहे हैं और न कोई कानूनी कार्रवाई करेंगे, न ही मीडिया में बयानबाजी।
समझौते में इन्होंने किए हस्ताक्षर?
समझौता पत्र पर प्रथम पक्ष के रूप में आनंद कुमार शर्मा और भावना के हस्ताक्षर हैं, जबकि दूसरे पक्ष से उपमा गुप्ता, रेखा शर्मा और शिखा ने हस्ताक्षर किए। गवाहों में राकेश कुमार, मुकेश कुमार, भावना शर्मा, आशा अग्रवाल और पवन समाधिया के अलावा कुछ और के नाम शामिल हैं।
भाजपा के लिए गले की फांस बन रहा था यह मामला
मामले में दोनों पक्ष भाजपा से जुड़े हुए हैं। उपमा गुप्ता जहां महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष हैं, वहीं आनंद शर्मा पार्टी का बूथ अध्यक्ष है। न्यूड वीडियो और मारपीट की घटना के बाद आनंद और मारपीट में शामिल कुछ महिलाओं की परतें खुलने लगीं तो पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को समझ में आने लगा था कि सार्वजनिक किरकिरी से बचना अब मुश्किल होगा। इसलिए विवाद को शांत करने के लिए अंदरखाने समझौते का रास्ता अपनाया गया।
दोनों ही पक्षों के लिए मजबूरी बन गया ‘समझौता’
अगर यह मामला पुलिस तक पहुंचता तो दोनों ही पक्ष कानूनी शिकंजे में फंसते। आनंद शर्मा पर अश्लील वीडियो भेजने का आरोप था, तो दूसरी ओर उपमा गुप्ता और उनके साथ की महिलाओं ने कानून हाथ में लेकर मारपीट की थी। इसलिए दोनों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता था- समझौता।
भाजपा की अंदरूनी राजनीति का असहज चेहरा
इस पूरे घटनाक्रम में जो भी सामने आया, उसने यह साफ कर दिया कि सत्ता में होने के बावजूद भाजपा के भीतर बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो पार्टी के घोषित चरित्र और अनुशासन से मेल नहीं खाता। भाजपा की अंदरूनी राजनीति में संघर्ष, अहंकार और वर्चस्व की लड़ाई गहराई तक फैली हुई है। सत्ता में होने के बावजूद पार्टी के भीतर ऐसी घटनाएं उसकी छवि को धूमिल कर रही हैं। समझौते से मामला तो थम गया लेकिन यह भाजपा के अनुशासन और महिला सम्मान, आंतरिक राजनीति, शक्ति संघर्ष और छवि प्रबंधन की कमजोर नसों को नंगा कर दिया।