जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया, जया किशोरी की भागवत कथा में हजारों भक्तों ने मनाया जन्मोत्सव

आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कथावाचक जया किशोरी की अमृतवाणी सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और श्रीराम जन्म की कथा के दौरान पूरा कथा परिसर गोकुल धाम जैसा नजर आया। श्रद्धालु जय श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच भक्ति में झूमते रहे और जन्मोत्सव पर उपहारों की जमकर वर्षा की गई। कथा के दौरान राधारानी और श्रीहरि के भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

Jul 26, 2026 - 20:54
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जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया, जया किशोरी की भागवत कथा में हजारों भक्तों ने मनाया जन्मोत्सव
राजदेवम में श्रीमद भागवत कथा सुनातीं कथावाचक जया किशोरी।

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान जया किशोरी ने व्यासपीठ से श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्म और भगवान वामन अवतार की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कृष्ण जन्म प्रसंग के दौरान "जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया, सबहि को बहुत बधाई है..." जैसे भजनों के साथ पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। मंच पर भगवान के स्वरूपों का मंचन भी किया गया, जिसने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी श्रद्धालुओं को आकर्षित किया।

कथा परिसर को विशेष रूप से गुब्बारों से सजाया गया था। जन्मोत्सव के अवसर पर बधाइयां गाई गईं और श्रद्धालु गोपी एवं सखा के भाव में झूमते नजर आए।

कथा व्यास ने धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि धर्म के प्रमुख लक्षण सत्य, दया, पवित्रता, संतोष और दान हैं। उन्होंने कहा कि गंगा में स्नान करने से सोची-समझी साजिश या जानबूझकर किए गए पाप समाप्त नहीं होते। अनजाने में हुए अपराधों का प्रायश्चित तभी संभव है जब व्यक्ति मन से पश्चाताप करे।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि पहले गलत कर्म कर लिए जाएं और बाद में किसी धार्मिक कर्मकांड से सब समाप्त हो जाएगा। धर्म की नींव सत्य और अच्छे कर्मों पर टिकी है।

राजा बलि और भगवान वामन अवतार की कथा सुनाते हुए जया किशोरी ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की है। मोहिनी अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि बाहरी सुंदरता के पीछे भागने से वास्तविक सुख नहीं मिलता। आकर्षण क्षणिक होता है, जबकि अच्छे गुण स्थायी संबंध बनाते हैं।

उन्होंने भक्त प्रह्लाद और भगवान श्रीहरि के संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि त्याग के बिना जीवन में वास्तविक तृप्ति नहीं मिल सकती। मनुष्य मोह, माया और भौतिक सुखों में उलझकर अपनी आध्यात्मिक शक्ति को भूल जाता है।

कथावाचक ने सत्संग के महत्व पर कहा कि जीवन में कुछ चीजों का कोई विकल्प नहीं होता। भूख लगने पर भोजन स्वयं करना पड़ता है, मृत्यु आने पर स्वयं ही सामना करना पड़ता है और सत्संग व भक्ति का फल भी व्यक्ति को स्वयं अर्जित करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि केवल किसी और के पुण्य से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास नहीं हो सकता।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी कथा का श्रवण करने पहुंचे।

SP_Singh AURGURU Editor