आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का जमीन अधिग्रहण अंतिम चरण में, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
आगरा। आगरा से ग्वालियर तक प्रस्तावित 88.400 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा हो चुका है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) इस परियोजना को 4613 करोड़ रुपये की लागत से सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस वे के रूप में विकसित कर रही है। अक्तूबर-नवंबर माह में निर्माण कार्य शुरू होने के संकेत हैं।
-88.4 किमी लंबा होगा सिक्स लेन एक्सप्रेस वे, 4613 करोड़ की लागत से होगा निर्माण
-अक्टूबर-नवंबर से शुरू होगा काम, जीेआर इंफ्रा कंपनी बना रही कैम्प कार्यालय
-एनएचएआई को टीटीजेड क्षेत्र में पेड़ काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लेनी है अनुमति
-220 करोड़ का मुआवजा तय, यूपी और एमपी में बांटा जा चुका है 21 करोड़ मुआवजा
-आगरा में इनर रिंग रोड से होगा जुड़ाव, दिल्ली से ग्वालियर की राह होगी सुगम
निर्माण कार्य के लिए जीआर इंफ्रा से है अनुबंध
एनएचएआई ने इस परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए जीआर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से अनुबंध किया है। कंपनी ने निर्माण से पहले कैंप कार्यालय बनाना शुरू कर दिया है। अक्टूबर-नवंबर से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। कंपनी को आवश्यक वित्त और संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
502.11 हेक्टेयर भूमि में से अधिकांश का अधिग्रहण पूरा
इस परियोजना के लिए कुल 502.11 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। उत्तर प्रदेश में 220 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया गया है, जिसमें से अब तक 14 करोड़ रुपये का वितरण हो चुका है। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में सात करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। बाकी किसानों की बैंक जानकारी एनएचएआई को मिलते ही शेष भुगतान भी कर दिया जाएगा।
तीन जिलों के 62 गांवों की भूमि पर बनेगा एक्सप्रेस वे
एक्सप्रेसवे के निर्माण में आगरा के 14, धौलपुर के 18 और मुरैना के 30 गांवों की जमीन ली जा रही है। यह सड़क आगरा से शुरू होकर राजस्थान के धौलपुर और फिर मध्यप्रदेश के मुरैना से होते हुए ग्वालियर के सुसेरा गांव तक पहुंचेगी।
आगरा में इनर रिंग रोड से होगा एक्सप्रेसवे का सीधा जुड़ाव
इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को आगरा के इनर रिंग रोड से जोड़ा जाएगा। इससे यमुना एक्सप्रेसवे से दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन इनर रिंग रोड से सीधे ग्वालियर की ओर जा सकेंगे। इस प्रोजेक्ट से आगरा और ग्वालियर के बीच की दूरी 32 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
पेड़ों की कटाई से पहले पौधरोपण, सुप्रीम कोर्ट से लेनी है मंजूरी
यह परियोजना ताज ट्रेपेजियम जोन (टीजीजेड) से होकर गुजरती है, इसलिए वहां के पेड़ों को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी है। पेड़ों की कटाई से पहले अपेक्षित पौधारोपण कराया जा रहा है। आगरा में जिला वन अधिकारी के माध्यम से यह काम तेजी से किया जा रहा है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से ताज ट्रेपेजियम जोन क्षेत्र को लेकर सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है। पौधारोपण पूरा होते ही सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की जाएगी, जिसके बाद पेड़ों की कटाई की अंतिम अनुमति मिल सकेगी।
30 महीनों में पूरा होगा निर्माण कार्य
अगर सभी आवश्यक स्वीकृतियां समय पर मिल जाती हैं तो यह ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे अगले 30 महीनों में बनकर तैयार हो जाएगा। यह मार्ग न केवल दिल्ली और ग्वालियर के बीच यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।