धर्मांतरण गैंग के लश्कर कनेक्शन की भी जांच: आगरा का रहमान कुरैशी सबसे खतरनाक चेहरा
आगरा। आगरा में पर्दाफाश हुए धर्मांतरण गैंग के लश्कर कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को इस तरह के संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के संबंध आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से भी हो सकते हैं। इधर पुलिस इस गिरोह का सबसे खतरनाक चेहरा आगरा निवासी रहमान कुरैशी को मान रही हैं, जो यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिग लड़कियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलता था। रहमान मूल रूप से किरावली का निवासी है और आगरा के वजीरपुरा इलाके में रह रहा था।
-पकड़े गये दस आरोपियों में से छह पहले हिंदू ही थे, इन लोगों समेत आगरा की दोनों बहनों को भी धर्मांतरण के काम में लगाया हुआ था गैंग ने
हिंदू से मुस्लिम बने 6 आरोपी, अब खुद धर्मांतरण के एजेंट
पुलिस द्वारा अब तक गिरफ्तार किए जा चुके 10 आरोपियों में से छह पहले हिंदू थे, जिन्होंने नाम और पहचान बदलकर इस्लाम अपना लिया और अब गरीब, दलित और कमजोर वर्ग को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
इनमें शामिल हैं- एसबी कृष्णा उर्फ आयशा, शेखर रॉय उर्फ हसन अली, ऋतिक बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम, रूपेंद्र सिंह उर्फ अब्दुर्रहमान, मोहम्मद अली उर्फ पीयूष पवार और मनोज उर्फ मुस्तफा। ये लोग फर्जी ट्रस्ट, राशन, इलाज, चमत्कार, और भूत-प्रेत से मुक्ति के नाम पर लोगों को बहकाते थे और इस्लाम कबूल करने के लिए प्रेरित करते थे।
इससे एक बात यह भी पता चलती है कि धर्मांतरण गैंग हिंदुओं को मुस्लिम बनाने का काम उन्हीं लोगों से करा रहा था जो पहले हिंदू थे। आगरा की जो दो बहनें मुस्लिम बन गई थीं, उन्हें भी धर्मांतरण के काम में लगाया जा चुका था। जांच एजेंसियों को हैरानी इस बात की है कि जो आरोपी पकड़े गये हैं, जिनमें से छह पहले हिंदू थे, वे सब उच्च शिक्षित हैं। इसके बाद भी धर्मांतरण गैंग के चंगुल में फंस गये।
धर्म छिपाकर सेवा के नाम पर प्रचार, मदरसे और एनजीओ बने जरिया
आरोपी नाम बदलकर लोगों से मिलते थे और धार्मिक पहचान छिपाकर समाज सेवा की आड़ में धर्मांतरण की कोशिश करते थे। कुछ आरोपी पहले धार्मिक संस्थानों से जुड़े रहे हैं। फर्जी एनजीओ और मदरसों के ज़रिए गरीबों तक पहुंच बनाते थे। ज़्यादातर शिकार दलित, बेरोजगार, दिव्यांग और जरूरतमंद लोग बने। इस्लाम अपनाओ, मदद पाओ, जैसी रणनीति अपनाई गई।
कनाडा, यूएस और खाड़ी देशों से फंडिंग; आयशा थी वितरक
गिरोह की फाइनेंस मैनेजर आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, जो गोवा की रहने वाली है, को गिरफ्तार किया जा चुका है। सैय्यद दाऊद अहमद नामक व्यक्ति कनाडा से फंडिंग भेजता था। दाऊद भोपाल का निवासी बताया गया है। आयशा ने "कनेक्टिंग रिजर्व" नाम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाए हुए थे। इन ग्रुप्स में शामिल धर्म बदल चुके लोग नए लोगों को जोड़ते और पैसे का ट्रांसफर करते।
सोशल मीडिया बना ब्रेनवॉश का हथियार
आगरा का रहमान कुरैशी यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया के ज़रिए नाबालिग लड़कियों को कट्टरपंथ की ओर मोड़ता था। कोलकाता से गिरफ्तार ओसामा उसका सहयोगी था। लड़कियों को परिवार से काटकर जिहादी सोच की ओर धकेला जाता था।
फर्जी सिम कार्ड और नकली दस्तावेजों से बचते थे पुलिस की निगाह से
मनोज उर्फ मुस्तफा गैंग का लॉजिस्टिक हेड था, जिसे दिल्ली से पकड़ा गया। यह पहले से एक्टिवेटेड फर्जी सिम कार्ड्स का इंतजाम करता था। ब्रेनवॉश की गई लड़कियों को बस के जरिए दूसरे राज्यों में भेजा जाता। ट्रेन का इस्तेमाल नहीं करते थे ताकि एजेंसियां ट्रेस न कर सकें।
लीगल सिस्टम का भी दुरुपयोग
गिरोह का लीगल एडवाइजर शेखर रॉय उर्फ हसन अली, जो कोलकाता में बैठकर धर्मांतरण से जुड़े कागजात तैयार करता था। अब यह भी गिरफ्तार हो चुका है। एजेंसियां मानती हैं कि यह गिरोह लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण को एक संगठित अभियान की तरह चला रहा था।
ये नाम भी जांच के घेरे में
जयपुर का अली, मुजफ्फरनगर का अबु तालिब, उत्तरांचल का अब्दुर्रहमान और गोवा का अली हसन जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सभी इस गिरोह में सक्रिय रूप से शामिल थे। कनाडा से फंडिंग भेजने वाले सैय्यद दाऊद अहमद की तलाश जारी है।