अकेलापन और सामाजिक अलगाव बढ़ा रहे आत्महत्या का खतरा, समय पर मदद जरूरी, आगरा कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने तनाव, अवसाद और सोशल मीडिया से बढ़ते मानसिक दबाव पर चिंता जताई

आगरा। अकेलापन, सामाजिक अलगाव, तनाव, असफलता और अवसाद जैसी स्थितियां समय रहते समझ में न आएं तो व्यक्ति को गंभीर मानसिक संकट की ओर ले जा सकती हैं। विशेष रूप से जेनरेशन-जेड में ब्रेकअप और सोशल मीडिया पर दूसरों से निरंतर तुलना मानसिक दबाव बढ़ा रही है। ऐसे में अपनी समस्याओं को दबाने के बजाय परिवार, मित्रों, शिक्षकों या विशेषज्ञों से साझा करना जरूरी है। यह बात आगरा कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।

Sep 10, 2026 - 18:27
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अकेलापन और सामाजिक अलगाव बढ़ा रहे आत्महत्या का खतरा, समय पर मदद जरूरी, आगरा कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने तनाव, अवसाद और सोशल मीडिया से बढ़ते मानसिक दबाव पर चिंता जताई
विश्व आत्महत्या दिवस पर आगरा कॊलेज में आयोजित संगोष्ठी में मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह का स्वागत करते शिक्षकगण।

आगरा कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के स्टूडेंट काउंसलिंग एवं सपोर्ट सेंटर तथा सुसाइड प्रीवेंशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष जैन और महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सी.के. गौतम ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया।

सरकारी प्रयासों और योजनाओं की दी जानकारी

मुख्य अतिथि डॉ. पीयूष जैन ने आत्महत्या की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों और विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अवसाद और पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसलिए समय रहते व्यक्ति की मानसिक स्थिति को समझना और उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।

महाविद्यालय की महापौर श्रीमती हेमलता दिवाकर ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को सफलता के लिए निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया और कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

मानसिक स्वास्थ्य पर कॉलेज में लगातार प्रयास

प्राचार्य प्रो. सी.के. गौतम ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आत्महत्या रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम चांद ने अपने प्रस्तुतीकरण में अकेलेपन और सामाजिक अलगाव को आत्महत्या के महत्वपूर्ण मनोसामाजिक कारकों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

सोशल मीडिया पर तुलना भी बन रही मानसिक दबाव का कारण

डॉ. शिव कुमार सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि खासकर जेनरेशन-जेड में तनाव, अकेलापन, असफलता, अवसाद, ब्रेकअप और सोशल मीडिया पर दूसरों से लगातार तुलना मानसिक दबाव बढ़ा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी समस्याओं को मन में दबाने के बजाय परिवार, मित्रों, शिक्षकों अथवा विशेषज्ञों से साझा करने का आह्वान किया।

डॉ. अंशु चौहान ने आत्महत्या रोकथाम में विभिन्न चिकित्सीय एवं उपचारात्मक विधियों पर प्रकाश डाला। डॉ. संतोष सिंह ने आत्महत्या से बचाव और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों की प्रासंगिकता बताई।

डॉ. रविशंकर ने किया स्वागत, डॉ. अरविंद ने जताया आभार

कार्यक्रम का स्वागत भाषण डॉ. रविशंकर सिंह ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अरविंद गुप्ता ने किया, जबकि संचालन डॉ. दीपाली सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. मृणाल शर्मा, डॉ. बी.के. चिकारा, डॉ. संध्या यादव, डॉ. अमिता सरकार, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, डॉ. माधुरी यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor