अवैध शस्त्र लाइसेंस केस में बड़ा मोड़, जैद–अरशद की जमानत पर 21 जनवरी को निर्णायक सुनवाई

आगरा में अवैध शस्त्र लाइसेंस और हथियार नेटवर्क से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी मोहम्मद जैद और अरशद ने जमानत के लिए अदालत का रुख किया है। हाईकोर्ट से अंतरिम राहत खत्म होने के बाद ट्रायल कोर्ट में सुनवाई तेज हुई है। जैद के कथित माफिया और बिल्डर कनेक्शन मामले को गंभीर बना रहे हैं, जबकि अरशद ने आर्थिक तंगी और लाइसेंस सरेंडर का हवाला दिया है। अब 21 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Jan 18, 2026 - 22:15
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अवैध शस्त्र लाइसेंस केस में बड़ा मोड़, जैद–अरशद की जमानत पर 21 जनवरी को निर्णायक सुनवाई
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हाईकोर्ट से राहत खत्म होने के बाद ट्रायल कोर्ट में तेज हुई प्रक्रिया, चर्चित कनेक्शनों ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

आगरा। अवैध शस्त्र लाइसेंस और हथियारों के नेटवर्क से जुड़े चर्चित मामले में नामजद आरोपी मोहम्मद जैद और अरशद ने आगरा की अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की है। मोहम्मद जैद की ओर से अधिवक्ता अवधेश शर्मा, जबकि अरशद की ओर से अधिवक्ता बृजेश कुमार सिंह ने अदालत में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया है।

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में इस मामले में हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत (स्टे) को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद से ही निचली अदालत में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की रफ्तार तेज हो गई। अब तक 7 जनवरी और 14 जनवरी को सुनवाई हो चुकी है, जबकि 21 जनवरी को इस प्रकरण में निर्णायक सुनवाई प्रस्तावित है।

यह मुकदमा वर्ष 2025 में थाना नाई की मंडी क्षेत्र में दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों को अवैध शस्त्र लाइसेंस जारी कराने और हथियारों की सप्लाई से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले थे। इसी नेटवर्क में मोहम्मद जैद और अरशद को प्रमुख आरोपी माना गया है।

जैद के कथित कनेक्शन चर्चा में

मोहम्मद जैद को लेकर आगरा के एक चर्चित बिल्डर के साथ नजदीकी संबंधों की लगातार चर्चा रही है, जिसकी जांच खुद एसटीएफ द्वारा की जा रही है। इतना ही नहीं, जब कुख्यात माफिया आगरा जेल में बंद था, उस दौरान जेल के भीतर जन्मदिन मनाए जाने के मामले में भी जैद और उसी बिल्डर का नाम सामने आया था। इस पूरे प्रकरण को लेकर पूर्व डीजीपी तक सार्वजनिक रूप से जैद और माफिया मुख्तार अंसारी के संबंधों पर टिप्पणी कर चुके हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।

अरशद की दलील

वहीं, जांच शुरू होते ही अरशद द्वारा अपने शस्त्र लाइसेंस सरेंडर किए जाने की बात सामने आई थी। जमानत याचिका में अरशद की ओर से आर्थिक तंगी और सहयोगात्मक रवैये का हवाला दिया गया है।

अब निगाहें 21 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि दोनों आरोपियों को जमानत दी जाए या नहीं। इस फैसले का असर न केवल आरोपियों पर, बल्कि अवैध शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क से जुड़े अन्य मामलों की दिशा पर भी पड़ सकता है।