मस्क ने ट्रंप के नए टैक्स और खर्च बिल को बताया पागलपन भरा

वाशिंगटन।  एलन मस्क ने एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रस्तावित नए टैक्स और खर्च बिल को पागलपन भरा और अमेरिका के लिए विनाशकारी बताया है। उन्होंने कहा कि यह ड्राफ्ट बिल अमेरिका को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और लाखों नौकरियों को खत्म कर देगा। कभी ट्रंप के करीबियों में शामिल रहे मस्क अब खुलकर ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते नजर आ रहे हैं।  

Jun 29, 2025 - 14:33
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मस्क ने ट्रंप के नए टैक्स और खर्च बिल को बताया पागलपन भरा


दरअसल ट्रंप प्रशासन की ओर से लाए जा रहे इस बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो अमेरिका की मौजूदा सामाजिक और आर्थिक संरचना पर गहरा असर डाल सकते हैं। मेडिकेड और फूड स्टैम्प्स जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में भारी खर्च कटौती, रक्षा और सुरक्षा बजट में बड़ा इजाफा जैसे, अमेरिका-मेक्सिको सीमा दीवार को बढ़ाने के लिए 46 अरब डॉलर, 1 लाख प्रवासी डिटेंशन बेड्स के लिए 45 अरब डॉलर, 10,000 नए आईसीई अधिकारियों की भर्ती, जिनके लिए 10,000 डॉलर साइनिंग बोनस, 350 अरब डॉलर की सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा योजना का हिस्सा आदि शामिल हैं।

एलन मस्क का मानना है कि यह बिल अमेरिका की भविष्य की टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रीज के लिए घातक हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह बिल भविष्य के उद्योगों को नुकसान पहुंचाकर पुराने उद्योगों को रियायतें देता है। इस बयान के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तेजी से उभरती हुई इंडस्ट्रीज के विकास में यह बिल रुकावट बन सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों को आदेश दिया है कि वे 4 जुलाई की राष्ट्रीय अवकाश से पहले इस बिल को सीनेट और हाउस से पारित कराएं। चूंकि रिपब्लिकन के पास दोनों सदनों में बहुमत है, ट्रंप इसे अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में लगे हैं। उन्होंने इस बिल को अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' रणनीति का हिस्सा बताया है, जिसमें देश की सीमाओं को मजबूत करना, गैरकानूनी प्रवासियों को निकालना और सुरक्षा पर खर्च बढ़ाना प्रमुख लक्ष्य हैं।

इस बिल का सबसे विवादास्पद पहलू है ट्रंप का वादा हर साल 10 लाख लोगों को अमेरिका से निकालने का। यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा डिपोर्टेशन अभियान होगा। हालांकि, इस योजना की आलोचना भी बढ़ती जा रही है। मस्क की तरह कई उद्योगपति, मानवाधिकार कार्यकर्ता और कुछ रिपब्लिकन सांसद भी इस पर चिंता जता चुके हैं।