नीट-यूजी 2025 को ‘आंसर की’ पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, छात्र ने मांगा नया रिजल्ट और काउंसलिंग पर रोक
नई दिल्ली। नीट-यूजी 2025 परीक्षा में एक नया विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। जम्मू के छात्र शिवम गांधी रैना ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए दावा किया है कि प्रश्न क्रमांक 136, 52 और 140 के उत्तर गलत थे, जिससे उन्हें 5 अंकों का नुकसान हुआ और उनकी रैंकिंग बुरी तरह प्रभावित हुई। याचिका में फाइनल आंसर की की समीक्षा, संशोधित रिजल्ट जारी करने और जब तक यह प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है।
क्या है छात्र की आपत्ति?
छात्र ने बताया कि तीन जून को जारी की गई प्रोविजनल आंसर की में तीन प्रश्नों (Q.52, Q.136 और Q.140) के उत्तर गलत थे। उन्होंने 4 जून को एनसीईआरटी की किताबों का हवाला देते हुए एनटीए को आपत्ति भेजी, लेकिन 14 जून को जारी फाइनल आंसर की में भी उत्तरों को नहीं बदला गया। इससे उन्हें चार अंक सीधे और एक अंक निगेटिव मार्किंग से नुकसान हुआ।
इस आधार पर की गई है याचिका?
याची छात्र शिवम गांधी रैना के वकील एडवोकेट सार्थक चतुर्वेदी ने बताया कि एनसीईआरटी कक्षा 11 की जीव विज्ञान की पुस्तक के पृष्ठ 245 पर साफ तौर पर लिखा है कि ‘एड्रीनल कॉर्टिकल हार्मोन हृदय गति को नियंत्रित करते हैं,’ लेकिन इसके बावजूद एनटीए ने Q.136 में गलत उत्तर ही फाइनल किया, जो सरासर अन्याय है।
पांच अंकों का नुकसान होने से रैंक गिरी
शिवम गांधी रैना को परीक्षा में कुल 565 अंक प्राप्त हुए, जिससे उनकी ऑल इंडिया रैंक 6783 और जनरल कैटेगरी रैंक 3195 आई। उनका दावा है कि अगर ये 5 अंक मिलते, तो उनकी रैंक बहुत बेहतर आती और उन्हें देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल सकता था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई?
-विवादित प्रश्नों की पुनः जांच कराई जाए।
-सही उत्तरों के आधार पर संशोधित अंक दिए जाएं।
-नया रिजल्ट जारी किया जाए।
-जब तक यह प्रक्रिया पूरी न हो, काउंसलिंग रोकी जाए।
याचिका सुप्रीम कोर्ट में एओआर श्रीराम पी, एडवोकेट सार्थक चतुर्वेदी, वैभव माहेश्वरी, डिम्पल सिरोही और प्रीति सिंह द्वारा दाखिल की गई है।
सुप्रीम कोर्ट पर सभी की निगाहें
ज्ञातव्य है कि नीट-यूजी 2025 की मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने वाली है। इस याचिका के बाद छात्रों, अभिभावक और मेडिकल प्रवेश की तैयारी कर रहे लाखों विद्यार्थियों की निगाहें शीर्ष अदालत के फैसले पर टिक गई हैं।