नेपाल ने दी भारत को तरजीह,  पीएम बालेन शाह ने भारतीय राजदूत को पहले बुलाया, आमने-सामने की वार्ता में कई मुद्दों पर चर्चा  

नेपाल के प्रधानमत्री बालेन शाह ने भारत के राजदूत नितिन श्रीवास्तव के साथ आमने-सामने की मुलाकात की है। यह पहला मौका है, जब बालेन शाह किसी विदेशी राजदूत से अकेले में आमने-सामने की मुलाकात की है। इस मुलाकात को नेपाल में भारत की बढ़ती अहमियत के रूप में देखा जा रहा है।

Aug 10, 2026 - 20:12
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नेपाल ने दी भारत को तरजीह,  पीएम बालेन शाह ने भारतीय राजदूत को पहले बुलाया, आमने-सामने की वार्ता में कई मुद्दों पर चर्चा  


 
काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपनी विदेश नीति में भारत की अहमियत को प्रदर्शित किया है। उन्होंने विदेशी राजदूतों के साथ पहली आमने-सामने की मुलाकात में भारत को अहमियत दी है। उन्होंने आज काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ बैठक की। इसके बाद शाम को उन्होंने चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाकात की। बालेन शाह मंगलवार को अमेरिकी दूतावास के डी'अफेयर्स स्कॉट अर्बोम से भी बैठक करेंगे। भारतीय राजदूत को सबसे पहले बुलाना नेपाल में भारत के प्रभाव को दर्शाता है। इससे पहले तक नेपाली पीएम बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों के साथ आमने-सामने की मुलाकात से दूरी बनाकर रखी थी।

नेपाल के प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, बैठक में नेपाल-भारत द्विपक्षीय संबंधों, आपसी हितों, विकास साझेदारी और सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा हुई। नवीन श्रीवास्तव ने पीएम बालेन शाह को बधाई दी और दोनों देशों के बीच संबंधों और सहयोग को और मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। सचिवालय ने बताया कि शाह ने भारत के साथ नेपाल के "ऐतिहासिक संबंधों" को और गहरा करने और साझा हितों वाले क्षेत्रों में मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।  

27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद से, बालेन शाह ने काठमांडू में मौजूद राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें करने से परहेज किया था। इसके बजाय, उन्होंने 9 अप्रैल और 26 मई को विदेशी राजदूतों के साथ संयुक्त बैठकें कीं। कुछ नेपाली राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने इस तरीके का स्वागत किया। उनका मानना ​​था कि समूह में बैठकें करना काठमांडू के राजनयिक समुदाय के साथ बातचीत का ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष तरीका है। हालांकि, उस बैठक में भारत, चीन और अमेरिका के राजदूत शामिल नहीं हुए थे। तब से इनकी मुलाकात को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी।

भारत आज भी नेपाल में सबसे ज्यादा प्रभावशाली देशों में से एक है। राजशाही के खात्मे के बाद कम्युनिस्ट सरकारों ने चीन से नजदीकियां बढ़ाई हैं। इसका बुरा असर भारत-नेपाल संबंधों पर पड़ा है। हालांकि, इसके बावजूद भारत आज भी नेपाल की विदेश नीति का महत्वपूर्ण और केंद्रीय स्तंभ है। प्रधानमंत्री बालेन शाह "नेपाल सबसे पहले" के सिद्धांत के साथ चीन और भारत दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों को एक ही दिन मुलाकात के लिए बुलाया है।