करियर की नई उड़ान: आंबेडकर विवि में ‘लॉ ओवर कॉफी’ कार्यक्रम ने दिखाए कानूनी पेशे के नए आयाम
आगरा। कानूनी शिक्षा अब सिर्फ अदालतों के फैसलों, दीवारों के बीच बहसों और मोटी किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आज यह बहुआयामी अवसरों और आधुनिक तकनीक से जुड़कर एक नवीन स्वरूप ले चुकी है। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के लॉ विभाग की पहल लीगल लर्न लॉ द्वारा शनिवार को आयोजित ‘लॉ ओवर कॉफी’ सत्र का चौथा संस्करण इसी नए कानूनी व्यावहारिक विचारधारा का सशक्त उदाहरण बना।
कार्यक्रम का आयोजन सिर्फ संवाद का मंच भर नहीं रहा, बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए कानून की उन गहराइयों तक झांकने का अवसर बनकर आया जहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम देखा गया।
भविष्य के कानूनी परिदृश्य की झलक
मुख्य वक्ता और लीगल लर्न लॊ के संस्थापक आदित्य शर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून अब केवल न्यायालय का विषय नहीं रहा, बल्कि यह व्यावसायिक दुनिया से लेकर सिविल सोसाइटी, मीडिया, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, कॉर्पोरेट व्यावसाय और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है। आज के वकील को कानून के साथ-साथ रणनीति, तकनीक और संवाद-कौशल भी जरूरी है।
उन्होंने उदाहरणों के साथ समझाया कि एक संवेदनशील, जागरूक और दक्ष कानूनी मन आज समाज में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
डिजिटल युग में वकील की पहचान
लीगल लर्न लॊ के सह-संस्थापक दिव्यांश श्रीवास्तव ने पर्सनल ब्रांडिंग और ऒनलाइन लीगल आइडेंटिटी की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब वकील केवल कानून जानने से परिभाषित नहीं होते, बल्कि उनकी ऑनलाइन प्रोफाइल, नेटवर्किंग स्किल्स और डिजिटल उपस्थिति ही अक्सर उन्हें करियर के नए अवसरों तक ले जाती है।
विचारों की सुरक्षा है असली ताकत
बौद्धिक संपदा कानून के विशेषज्ञ और आरएसआर लीगल के पार्टनर रोहन रैहोत्रा ने बौद्धिक संपदा (आईपी) की महत्ता पर प्रेरणादायी सत्र लिया। उन्होंने कहा कि विचारों की सुरक्षा ही शक्ति है और बौद्धिक संपदा कानून इसके संरक्षण की कुंजी है। जैसे-जैसे रचनात्मकता और नवाचार बढ़ रहा है, आईपी कानून की प्रासंगिकता और मांग भी बढ़ती जा रही है।
कार्यशाला की अवधारणा और संचालन में डॉ. रज़ीव वर्मा (समन्वयक), डॉ. अभिषेक शर्मा, डॉ. रणविजय सिंह व आरोही दीक्षित का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को सिद्धांत से ज्यादा प्रैक्टिकल नॉलेज देना था, जिससे वे इंडस्ट्री रेडी बन सकें और कानून की नई संभावनाओं को तलाशने में सक्षम हों। एलएलबी और एलएलएम के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सत्र को जीवंतता दी।