राणा सांगा केस की अगली सुनवाई 22 जुलाई को, भारत सरकार को विपक्षी पक्षकार बनाने का प्रार्थना पत्र दाखिल

आगरा। इतिहास से जुड़े चर्चित राणा सांगा केस में शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई हुई। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह द्वारा दायर प्रकीर्ण वाद संख्या-128/2025 (अजय प्रताप सिंह आदि बनाम अखिलेश यादव आदि) की सुनवाई में वादी पक्ष ने भारत सरकार को विपक्षी बनाने और मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के लिए अदालत में दो अलग-अलग प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए।

Jul 11, 2025 - 19:45
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राणा सांगा केस की अगली सुनवाई 22 जुलाई को, भारत सरकार को विपक्षी पक्षकार बनाने का प्रार्थना पत्र दाखिल

-जनहित से जुड़े ऐतिहासिक महत्व के मामले में प्रतिनिधि वाद दर्ज करने की भी की गई मांग

वादी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 13 मई 2025 को जिला जज द्वारा इस केस को पुनः सुनने का आदेश पारित किया गया था। इसी के अनुपालन में वादी पक्ष ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार को केस में आवश्यक पक्षकार मानते हुए सीपीसी की धारा 80(2) और आदेश 1 नियम 10 के अंतर्गत विपक्षी बनाए जाने का अनुरोध किया।

इसके साथ ही अधिवक्ता ने आदेश 1 नियम 8 सीपीसी के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर इसे प्रतिनिधि वाद के रूप में दर्ज किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि यह मामला ऐतिहासिक धरोहर और जनहित से जुड़ा है, अतः इसे सामूहिक हित में प्रतिनिधि मुकदमे के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए।

वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि 13 मई को जिला जज महोदय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि न्यायालय को यह परीक्षण करना है कि क्या भारत सरकार इस प्रकरण में आवश्यक पक्षकार है। इस आधार पर, भारत सरकार को विपक्षी बनाए जाने हेतु प्रार्थना पत्र के साथ दो माह की नोटिस अवधि में छूट मांगी गई है, जिसके लिए धारा 80(2) सीपीसी में विशेष अनुमति भी मांगी गई।

कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई 2025 की तिथि नियत की है।
इस दौरान अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश सिकरवार, शिव आधार सिंह तोमर और एस.पी. सिंह सिकरवार उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor