जौहर यूनिवर्सिटी पर नहीं चलेगा बुलडोजर,  डीएम के आदेश पर रोक,  मंडलायुक्त के फैसले का इंतजार

 मुरादाबाद मंडल आयुक्त के आदेश के बाद जिला प्रशासन अब अगले निर्देश मिलने तक यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं करेगा।

Jul 27, 2026 - 19:09
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जौहर यूनिवर्सिटी पर नहीं चलेगा बुलडोजर,  डीएम के आदेश पर रोक,  मंडलायुक्त के फैसले का इंतजार

मुरादाबाद। रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। मुरादाबाद मंडल आयुक्त ने डीएम रामपुर के आदेश पर रोक लगाते हुए हुए मामले में अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही फिलहाल यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलने की संभावना टल गई है।

आयुक्त के आदेश के बाद जिला प्रशासन अब अगले निर्देश मिलने तक यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं करेगा। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। इस प्रकरण की सुनवाई सोमवार को प्रस्तावित थी, लेकिन न्यायालय में शोक (कंडोलेंस) के कारण अवकाश रहने से सुनवाई अब अगली तारीख पर होगी।

दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कथित अवैध निर्माण को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू की थी। आरडीए ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था।

प्राधिकरण की जांच में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवन बिना स्वीकृत मानचित्र के तैयार किए गए हैं। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर इन निर्माणों को स्वयं हटाने का निर्देश दिया गया था। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर जिला प्रशासन अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा।

हालांकि, अब आयुक्त की ओर से अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई फिलहाल ठहर गई है। ऐसे में अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें अगली न्यायिक सुनवाई और आयुक्त के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। जौहर यूनिवर्सिटी का यह मामला एक बड़ा राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है, जहां विपक्ष के नेता इसे लेकर सरकार पर हमलावर हैं। वहीं जिला अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि यह कार्रवाई भवन निर्माण नियमों के कथित उल्लंघन पर आधारित है।