25 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ! आगरा के अधिवक्ताओं पर लाठी बरसाने वालों का हिसाब मांगने वाली चिट्ठी डीजीपी मुख्यालय से पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंची

आगरा। आगरा दीवानी न्यायालय परिसर में 26 सितंबर 2001 को अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के 25 वर्ष बाद भी दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध हुई कार्रवाई का आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। अब इस बहुचर्चित प्रकरण की सरकारी फाइलें फिर खुलने लगी हैं। जस्टिस गिरधर मालवीय जांच आयोग की संपूर्ण रिपोर्ट और उस पर शासन की कार्रवाई का विवरण हासिल करने के लिए दाखिल सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन पर प्रथम अपील के बाद पुलिस महानिदेशक (DGP) मुख्यालय ने 27 अक्टूबर 2026 को आगरा पुलिस आयुक्त कार्यालय को पत्र भेजा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अभिलेख जुटाने के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय से एसीपी कोतवाली को नामित किया गया है। इससे 25 साल पुराने मामले में तत्कालीन पुलिस कार्रवाई, अधिकारियों की भूमिका और विभागीय कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज सामने आने की उम्मीद बढ़ी है।

Nov 4, 2026 - 21:13
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25 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ! आगरा के अधिवक्ताओं पर लाठी बरसाने वालों का हिसाब मांगने वाली चिट्ठी डीजीपी मुख्यालय से पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंची

गृह विभाग से शुरू हुई आरटीआई की लड़ाई

अधिवक्ता नरेश कुमार पारस ने 11 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग में आरटीआई आवेदन दाखिल कर जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग की संपूर्ण जांच रिपोर्ट, शासन द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट,  दोषी अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई और संबंधित पत्रावलियों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।

गृह विभाग ने 21 सितंबर 2026 को आवेदन पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश कार्यालय को स्थानांतरित कर दिया। निर्धारित समय में मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं होने पर नरेश कुमार पारस ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस महानिदेशक कार्यालय के समक्ष प्रथम अपील दाखिल की।

डीजीपी मुख्यालय का आगरा पुलिस आयुक्त को पत्र

प्रथम अपील के बाद पुलिस मुख्यालय ने 27 अक्टूबर 2026 को आगरा पुलिस आयुक्त कार्यालय को पत्र भेजकर प्रकरण से संबंधित आवश्यक कार्रवाई और सूचनाएं जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इसके लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय से एसीपी कोतवाली को सूचना संग्रह की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी है कि लाठीचार्ज की घटना आगरा में हुई थी। लिहाजा तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट, पुलिसकर्मियों की तैनाती और ड्यूटी का विवरण, घटना के बाद तैयार किए गए दस्तावेज, विभागीय जांच तथा शासन के साथ हुए पत्राचार से संबंधित अभिलेख स्थानीय पुलिस के पास उपलब्ध हो सकते हैं।

स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड से खुल सकते हैं कई अहम राज

अब आगरा पुलिस आयुक्त कार्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि 26 सितंबर 2001 को दीवानी परिसर में हुई कार्रवाई के बाद पुलिस ने क्या रिपोर्ट तैयार की थी, किन अधिकारियों ने शासन को घटना की जानकारी दी थी और उसके बाद विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए गए थे।

यदि इन अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध होती हैं तो तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका और घटना के बाद हुई कार्रवाई की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है। हालांकि जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग की पूरी रिपोर्ट, गृह विभाग की नोटशीट और विधानसभा में रिपोर्ट रखे जाने से जुड़े दस्तावेजों के लिए संबंधित शासन एवं अन्य अभिलेख धारक कार्यालयों से भी सूचना प्राप्त करनी होगी।

आरटीआई में उठाए पांच बड़े सवाल

नरेश कुमार पारस ने अपने आवेदन में पांच प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।

-जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग की संपूर्ण जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति।

-आयोग की संस्तुतियों पर शासन द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR)।

-दोषी पाए गए अधिकारियों की नामवार सूची और उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण।

-आयोग की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखे जाने से संबंधित अभिलेख।

-दोषी अधिकारियों के विरुद्ध शुरू की गई विभागीय एवं न्यायिक प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति।

इन सवालों के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयोग की जांच के बाद शासन ने वास्तव में क्या कदम उठाए और उसकी संस्तुतियों का कितना पालन किया गया।

25 साल से हर 26 सितंबर को मनाते हैं काला दिवस

गौरतलब है कि 26 सितंबर 2001 को आगरा दीवानी न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। घटना के बाद जस्टिस गिरधर मालवीय की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग की रिपोर्ट और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्ट में अधिकारियों के संबंध में प्रतिकूल निष्कर्ष और कार्रवाई की संस्तुतियों का भी उल्लेख किया जाता रहा है।

इसके बावजूद दोषी पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध शासन ने क्या कार्रवाई की, किन अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हुई और किसी के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी या नहीं, इसका प्रमाणित दस्तावेजी विवरण अब तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सका है। आगरा के अधिवक्ता हर वर्ष 26 सितंबर को इस घटना की याद में काला दिवस मनाते हैं और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाते रहे हैं।

अब जवाबदेही तय करने की बारी

25 वर्ष बाद भी इस प्रकरण में तीन सवाल अनुत्तरित हैं- आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? दोषी पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध वास्तव में क्या कार्रवाई हुई? और अधिवक्ताओं को अपने साथ हुई घटना का सरकारी रिकॉर्ड हासिल करने के लिए आज भी आरटीआई और प्रथम अपील का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?

दीवानी परिसर में 25 साल पहले हुए लाठीचार्ज का मामला अब केवल इतिहास की घटना नहीं रह गया है। यह सरकारी जवाबदेही, पारदर्शिता और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े सवालों का भी विषय है। अब देखना होगा कि पुलिस मुख्यालय और आगरा पुलिस आयुक्त कार्यालय से कौन-से दस्तावेज सामने आते हैं और क्या उनसे इस लंबे समय से अनुत्तरित मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो पाती है।

SP_Singh AURGURU Editor