एक गाड़ी-तीन नंबर, अदालत में खुली दस्तावेजों की गड़बड़ी
आगरा में जमानत के लिए अदालत में पेश किए गए वाहन संबंधी दस्तावेजों में कथित बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जमानत दस्तावेजों में वाहन नंबर यूपी83 एटी 7746, जबकि मूल मुकदमे में यूपी80 एचएन 4944 दर्ज बताया गया। RC और बीमा प्रमाणपत्र में इंजन व चेसिस नंबरों को लेकर भी अंतर सामने आने का आरोप है। अदालत के लिपिक शिवकुमार गोला की शिकायत पर न्यू आगरा थाने में बीना देवी, अरुण कुमार शर्मा और अधिवक्ता नरेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
आरसी में अलग इंजन-चेसिस नंबर, बीमा प्रमाणपत्र में दूसरा विवरण और जिस मुकदमे में जमानत मांगी गई, उसमें वाहन नंबर ही निकला अलग, दस्तावेजों के मिलान के दौरान सामने आई कथित फर्जीवाड़े की तस्वीर
आगरा। अदालत में जमानत के लिए पेश किए गए वाहन संबंधी दस्तावेजों के मिलान के दौरान ऐसी गड़बड़ी सामने आई, जिसने पूरे मामले को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। एक ही वाहन की पहचान से जुड़े दस्तावेजों में अलग-अलग नंबर दर्ज पाए गए। इतना ही नहीं, जिस मुकदमे में जमानत मांगी गई, उसमें दर्ज वाहन नंबर भी जमानत के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में दर्ज नंबर से अलग निकला। मामला इतना गंभीर था कि दस्तावेजों की जांच के दौरान वाहन के नंबर और उसकी पहचान से संबंधित विवरणों में कथित तौर पर बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद अदालत को गुमराह करने के प्रयास और कथित रूप से फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोपों को लेकर कार्रवाई की गई।
मामले में सबसे बड़ा सवाल वाहन नंबर को लेकर खड़ा हुआ। जमानत के लिए पेश किए गए दस्तावेजों में वाहन नंबर यूपी83 एटी 7746 दर्ज था, जबकि मूल मुकदमे में संबंधित वाहन का नंबर यूपी80 एचएन 4944 दर्ज बताया गया है। यानी एक ही मामले से जुड़े दस्तावेजों में वाहन की पहचान के लिए दो अलग-अलग नंबर सामने आए। अदालत में दस्तावेजों के मिलान के दौरान जब वाहन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई तो मामला और पेचीदा हो गया। RC और बीमा प्रमाणपत्र में दर्ज वाहन के इंजन और चेसिस नंबरों में भी अंतर पाए जाने का आरोप है। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि आखिर जमानत के लिए अदालत के समक्ष किस वाहन से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए थे।
सिर्फ नंबर नहीं, इंजन-चेसिस विवरण पर भी सवाल
मामले की गंभीरता इस बात से बढ़ गई कि कथित गड़बड़ी केवल वाहन के पंजीकरण नंबर तक सीमित नहीं रही। दस्तावेजों में वाहन की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजन और चेसिस नंबरों को लेकर भी अंतर सामने आने की बात कही गई है। वाहन की पहचान में इंजन और चेसिस नंबर महत्वपूर्ण दस्तावेजी आधार माने जाते हैं। ऐसे में यदि अलग-अलग दस्तावेजों में इनके विवरण अलग हों तो स्वाभाविक रूप से दस्तावेजों की वास्तविकता और उनके इस्तेमाल के उद्देश्य पर सवाल उठते हैं।
अदालत को गुमराह करने के प्रयास का आरोप
दस्तावेजों में सामने आई इस कथित विसंगति के बाद आरोप लगाया गया कि जमानत हासिल करने के लिए ऐसे कागजात अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए, जिनसे न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया। दस्तावेजों की जांच के दौरान सामने आए अंतर ने मामले को सामान्य जमानत प्रक्रिया से निकालकर कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े के सवाल तक पहुंचा दिया। मामले में अदालत के लिपिक शिवकुमार गोला की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। शिकायत के आधार पर थाना न्यू आगरा में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
वकील सहित तीन आरोपी
मुकदमे में बीना देवी, अरुण कुमार शर्मा और अधिवक्ता नरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि जमानत के लिए पेश किए गए दस्तावेज कहां से तैयार हुए, उनमें दर्ज वाहन नंबर और इंजन-चेसिस नंबरों का वास्तविक रिकॉर्ड से क्या संबंध है और मूल मुकदमे में दर्ज वाहन से इन दस्तावेजों का मिलान क्यों नहीं हुआ।
तीन नंबरों ने बढ़ाई दस्तावेजों की कहानी की उलझन
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वाहन की पहचान से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग तस्वीर पेश करते नजर आए। मूल मुकदमे का वाहन नंबर यूपी80 एचएन 4944, जबकि जमानत दस्तावेजों में यूपी83 एटी 7746 दर्ज पाया गया। इसके साथ ही RC और बीमा प्रमाणपत्र में इंजन और चेसिस नंबरों को लेकर भी कथित अंतर सामने आया। अदालत में दस्तावेजों के मिलान के दौरान सामने आई यह गड़बड़ी अब पुलिस जांच का विषय बन गई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों में यह अंतर किस स्तर पर और किस उद्देश्य से हुआ। फिलहाल न्यू आगरा थाने में दर्ज मुकदमे के बाद मामले ने कानूनी प्रक्रिया में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।