आगरा कॊलेज में बीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का ओरिएंटेशन प्रोग्रामः अनुशासन की दी गई सीख
आगरा। आगरा कॉलेज, आगरा के ऐतिहासिक गंगाधर शास्त्री भवन में मंगलवार को बीए प्रथम वर्ष में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित किए गए ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्राध्यापकों ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवागंतुक छात्रों को महाविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक, तकनीकी एवं सह-पाठ्यक्रमीय संरचना से परिचित कराना था, जिससे वे अपने अकादमिक जीवन की शुरुआत सुव्यवस्थित ढंग से कर सकें।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सी. के. गौतम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्रों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आगरा कॉलेज का ऐतिहासिक गौरव, आधुनिक तकनीक के साथ एक नया स्वरूप ले रहा है। छात्र परामर्श प्रणाली, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, और विवि से जुड़ी सूचनाओं की पारदर्शिता ने कॉलेज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए प्रमुख विषय
प्रो. मृणाल शर्मा ने प्रवेश प्रक्रिया, विषय संयोजन, एनसीसी, एनएसएस और रोवर्स-रेन्जर्स की जानकारी दी।
प्रो. वी. के. सिंह ने ड्रेस कोड, अनुशासन नीति, और मोबाइल उपयोग की मर्यादाओं पर जोर दिया।
प्रो. संध्या यादव ने छात्राओं हेतु बनाए गए सुरक्षा प्रावधानों व महिला प्रकोष्ठ की भूमिका स्पष्ट की।
प्रो. गौरांग मिश्रा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत एफवाईयूपी (फोर इयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम), मेजर-माइनर विषय संरचना, टाइमटेबल, सूचना प्रसारण प्रणाली एवं विवि वेबसाइट के उपयोग पर चर्चा की।
प्रो. भूपाल सिंह ने वोकेशनल पाठ्यक्रमों व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी दी।
प्रो. पूनम चांद ने मानसिक स्वास्थ्य, एंटी-रैगिंग समिति, 'वाणी' पत्रिका व सांस्कृतिक भागीदारी पर प्रेरक विचार रखे।
डॉ. दिग्विजय नाथ राय ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु संसाधनों और मार्गदर्शन प्रणाली पर प्रकाश डाला।
प्रो. रीता निगम ने एनएसएस की पंजीकरण प्रक्रिया और समाजसेवा की भूमिका पर संवाद किया।
प्रो. कल्पना चतुर्वेदी ने रोवर्स-रेन्जर्स के ज़रिए सामाजिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. एस. के. पांडे ने अपने प्रेरणास्पद वक्तव्य में छात्रों को अनुशासन, लक्ष्य निर्धारण और निरंतर प्रयास की सीख दी।
वरिष्ठ प्राध्यापकों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में महाविद्यालय के अनेक सम्मानित शिक्षकगण उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. शिव कुमार सिंह, डॉ. गौरव कौशिक, प्रो. दिग्विजय पाल सिंह, प्रो. सुरेंद्र पाल सिंह, प्रो. उमाकांत चौबे, प्रो. महादेव सिंह, डॉ. शैलेंद्र कुमार, प्रो. अरविंद गुप्ता, डॉ. अमरेश यादव, डॉ. अचिंत वर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी विद्वानों ने अपने अनुभवों से छात्रों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. गौरांग मिश्रा द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया। छात्र-छात्राओं के साथ संवाद, वक्ताओं का स्वागत और विषय समन्वय उन्होंने दक्षता से निभाया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।