पाकिस्तान का नया सामरिक अड्डा सोमालिया में होगा, दोनों के देश के बीच हुआ समझौता, हिंद महासागर में भारत की बढ़ेगी चुनौती
पाकिस्तान और सोमालिया ने रक्षा समझौता किया है। इस रक्षा समझौते से पाकिस्तान की सैन्य उपस्थिति हॉर्न ऑफ अफ्रीका में बढ़ सकती है। इस इलाके में चीनी नौसेना और तुर्की पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में पाकिस्तान इन देशों के साथ मिलकर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, जिसका सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ेगा।
मोगादिशु। अफ्रीकी देश सोमालिया इन दिनों भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान का रणनीतिक साझेदार बना है। सोमालिया ने पाकिस्तान के जेएफ-17 में भी रुचि दिखाई है। 4 अगस्त को पाकिस्तान और सोमालिया ने द्विपक्षीय रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इस रक्षा समझौते के अनुसार, पाकिस्तान और सोमालिया आतंकवाद-विरोधी गतिविधियां, सैन्य प्रशिक्षण, नॉलेज और एक्सपीरियंस शेयरिंग और क्षमता निर्माण में एक दूसरे का सहयोग करेंगे। इस समझौते के ठीक तीन दिन बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया।
सोमालिया अफ्रीका का एक महत्वपूर्ण देश है। इस देश की सबसे बड़ी खासियत इसका रणनीतिक स्थान पर स्थित होना है। सोमालिया हॉर्न ऑफ अफ्रीका में स्थित है। जिसकी मुख्य भूमि की तटरेखा अफ्रीका में सबसे लंबी (3,300 किमी से अधिक) है। यह देश अदन की खाड़ी और हिंद महासागर के पास स्थित है, जो एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग का हिस्सा है। सोमालिया जब चाहे तब वैश्विक नौवहन के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है, खासकर लाल सागर से होने वाले व्यापार में। सोमालियाई डाकू तो पूरी दुनिया में पहले से ही कुख्यात हैं।
पाकिस्तान पारंपरिक रूप से हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा शक्ति नहीं रहा है। यह वही क्षेत्र है, जहां सऊदी अरब और तुर्की अपनी रणनीतिक उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं। इसी कारण सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के हित आपस में टकरा रहे हैं और दोनों देशों में तनाव देखने को मिल रहा है। इस कारण पाकिस्तान सोमालिया के साथ रक्षा संबंध स्थापित कर हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना चाहता है। इसका लाभ सऊदी अरब और तुर्की को भी होगा।
सोमालिया में पाकिस्तान कोई नया नहीं है। 1990 के दशक की शुरुआत में पूर्वी अफ्रीकी देश में संयुक्त राष्ट्र के अभियान में पाकिस्तानी सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पाकिस्तानी सैनिक 1995 में मोगादिशु छोड़ने वाले अंतिम अंतरराष्ट्रीय दलों में शामिल थे। पाकिस्तान, सोमालिया में अफ्रीकी संघ मिशन (AMISOM) या सोमालिया में अफ्रीकी संघ संक्रमण मिशन (ATMIS) में प्रमुख अफ्रीकी सैन्य योगदानकर्ताओं में से नहीं था।
सोमालिया की गिनती अफ्रीका के सबसे गरीब देशों में होती है। वह लंबे समय से आतंकवाद, राजनीतिक अस्थिरता, समुद्री डकैती और गृहयुद्ध से जूझ रहा है। ऐसे में सोमालिया को उम्मीद है कि पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध स्थापित कर वह खुद को सैन्य रूप से शक्तिशाली बना पाएगा। सोमालिया को पाकिस्तानी सेना के आतंकरोधी अभियानों का अनुभव, पेशेवर सैन्य प्रशिक्षण, सस्ते और किफायदी हथियार चाहिए।