शिवपुरी में शिकार-आगरा में सौदा, 10 तेंदुओं की खाल के साथ अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्कर गिरोह गिरफ्तार

आगरा के सैंया क्षेत्र में वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त कार्रवाई में 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया। तीन महीने तक ग्राहक बनकर बिछाए गए जाल के बाद होटल में छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा गया। शुरुआती पूछताछ में खाल और तेंदुओं के सिर मध्य प्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र से लाए जाने की बात सामने आई है। अब पूरे नेटवर्क और शिकार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

Jul 23, 2026 - 22:54
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शिवपुरी में शिकार-आगरा में सौदा, 10 तेंदुओं की खाल के साथ अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्कर गिरोह गिरफ्तार
वन विभाग की टीम की गिरफ्त में वन्यजीव तस्कर।

आगरा। आगरा के थाना सैंया क्षेत्र में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आगरा वन प्रभाग, आगरा पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। संयुक्त टीम ने एक होटल में छापेमारी कर 10 तेंदुओं (लेपर्ड) की खाल के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को वन्यजीव अपराध के खिलाफ हाल के समय की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में माना जा रहा है।

तीन महीने तक चला गुप्त ऑपरेशन

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह की गतिविधियों पर पिछले करीब तीन महीने से लगातार नजर रखी जा रही थी। आरोपियों तक पहुंचने के लिए टीम ने ग्राहक बनकर तेंदुए की खाल खरीदने की योजना बनाई। जब सौदा तय हुआ तो आरोपियों को सैंया क्षेत्र के एक होटल में बुलाया गया, जहां पहले से मौजूद संयुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

चार राज्यों से जुड़े तस्कर गिरफ्तार

कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सतपाल नाथ निवासी फरीदाबाद (हरियाणा), भोगीराम आदिवासी निवासी शिवपुरी (मध्य प्रदेश), गब्बर निवासी मुरैना (मध्य प्रदेश) और भगत सिंह निवासी हरियाणा के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 10 तेंदुओं की खाल बरामद की गई है।

शिवपुरी से शिकार कर लाए गए थे वन्यजीव अवशेष

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि तेंदुओं का शिकार मध्य प्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र में किया गया था। इसके बाद उनकी खाल और सिर विभिन्न राज्यों के रास्ते आगरा लाए गए, जहां उनकी खरीद-फरोख्त की तैयारी चल रही थी। हालांकि वन विभाग अभी इस पूरे खुलासे की आधिकारिक पुष्टि और जांच कर रहा है।

पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी जांच एजेंसियां

वन विभाग और पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं, शिकार कहां-कहां किया गया, खालों की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए होती थी और इन्हें किन खरीदारों तक पहुंचाया जाना था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों में सक्रिय वन्यजीव तस्करी सिंडिकेट से जुड़े हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।