आगरा में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने निकले सपाइयों को पुलिस ने रोका! धक्का-मुक्की के बीच लाठियां फटकारी गईं, अफसरों को सौंपा ज्ञापन

आगरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को जनसमस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपने जा रहे समाजवादी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इस दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज भी किया। विरोध के बीच सपा नेताओं ने मौके पर धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अंततः मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दिया।

Jul 25, 2026 - 20:05
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आगरा में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने निकले सपाइयों को पुलिस ने रोका! धक्का-मुक्की के बीच लाठियां फटकारी गईं, अफसरों को सौंपा ज्ञापन
सपा कार्यालय के बाहर का दृश्य, जहां कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए मौजूद पुलिस बल। चित्र में पुलिस के बीच से आगे बढ़ने की कोशिश करते महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास।

शनिवार को मुख्यमंत्री के आगरा आगमन के अवसर पर समाजवादी पार्टी महानगर कार्यालय पर बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्र हुए। जैसे ही समाजवादी कार्यकर्ता कार्यालय से बाहर निकले, पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे केवल लोकतांत्रिक अधिकार के तहत मुख्यमंत्री तक जनता की समस्याएं पहुंचाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी।

समाजवादी पार्टी के आरोप के अनुसार स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने लाठियां फटकारते हुए कार्यकर्ताओं को पीछे धकेला और उन्हें तितर-बितर करने का प्रयास किया। इसके विरोध में समाजवादी कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया।

मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में आगरा के विकास और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। इनमें अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का शीघ्र निर्माण, यमुना बैराज परियोजना को तत्काल स्वीकृति, अंतरराष्ट्रीय लेदर इंडस्ट्री एवं एक्सपोर्ट हब की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट एवं बहुउद्देश्यीय स्टेडियम का निर्माण, बंद पड़े इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों को पुनर्जीवित करना, आगरा मेट्रो का विस्तार, शहर की पेयजल, सीवर, ट्रैफिक और स्मार्ट सिटी की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना तथा पर्यटन, एमएसएमई और युवाओं के लिए विशेष रोजगार पैकेज लागू करना प्रमुख रूप से शामिल हैं।

महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता की आवाज उठाने से कभी पीछे नहीं हटेगी। लोकतंत्र में जनता के निर्वाचित मुख्यमंत्री तक जनसमस्याएं पहुंचाना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है। यदि शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन देने जा रहे लोगों को भी बलपूर्वक रोका जाता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष छात्रसभा क़ादिर कुरैशी, महानगर उपाध्यक्ष जिया चौधरी, प्रमोद यादव, हर्षवर्धन धाकड़, बलवेंद्र सिंह जाटव, नरेंद्र सिंह धाकड़, समीर अब्बास, नरेंद्र सिंह नंद, विनोद श्रोत्रिय, इम्लाक अहमद, जमील सिद्दीकी, ओम पंडित, रूबी सिंह जादौन, सरबन सोनकर, अकील अब्बास, राशिद मेव, मुबीन उस्मानी, मुजाहिद कुरेशी, अंकित निगम, फ़हीम उस्मानी, राजेश यादव और सलमान ख़ान सहित बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

जनआंदोलनों के आगे सत्ता को झुकना ही पड़ता है: शब्बीर अब्बास

आगरा। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों द्वारा चलाए गए आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की संगठित आवाज़ को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार जवाबदेही की मांग उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा।

शब्बीर अब्बास ने कहा कि देश ने पिछले कुछ वर्षों में किसान आंदोलन, रोजगार एवं भर्ती परीक्षाओं से जुड़े आंदोलनों सहित अनेक बड़े जनआंदोलन देखे हैं। इन आंदोलनों के दौरान कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिससे देश का जनमानस व्यथित हुआ। उनका कहना था कि अनेक मामलों में पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय और जवाबदेही का एहसास नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की बात सुनना और नैतिक जवाबदेही तय करना है। यदि जनता संगठित होकर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करती है, तो बड़े से बड़ा सत्ता तंत्र भी उसके सामने झुकने के लिए मजबूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में निहित है और जनहित के मुद्दों पर सरकारों को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

SP_Singh AURGURU Editor