राष्ट्रपति ने आईवीआरआई दीक्षांत समारोह में दिया करुणा, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक शोध का संदेश

बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के 11वें दीक्षांत समारोह में आज देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने करुणा से परिपूर्ण और विज्ञान से परिपुष्ट संदेश दिया। उन्होंने पशु चिकित्सा को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा बताया और विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे बेजुबान प्राणियों के कल्याण को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाएं। संस्थान के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने छात्र-छात्राओं को उपाधियां भी वितरित कीं।

Jun 30, 2025 - 19:11
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राष्ट्रपति ने आईवीआरआई दीक्षांत समारोह में दिया करुणा, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक शोध का संदेश
बरेली में सोमवार को आईवीआरआई के दीक्षांत समारोह में उपाधियां वितरित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। चित्र में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ व अन्य अतिथि भी हैं।

आईवीआरआई बरेली के दीक्षांत समारोह के बाद उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-चात्राओं के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह, झारखंड के राज्यपाल संतोश गंगवार एवं विवि के अधिकारी।  

पशु और मानव का रिश्ता सिर्फ उपयोग का नहीं, यह परिवार का रिश्ता है

राष्ट्रपति ने कहा कि जिन क्षेत्रों से वे आती हैं, वहां प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव होता है। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक जीवनशैली में भले ही पशु हमारी दिनचर्या से दूर हो गए हों, लेकिन हमारे बचपन में पशु ही हमारे साथी, सहायक और जीवन के अभिन्न अंग थे।

उन्होंने भावपूर्ण स्वर में कहा कि पशु हमारे जीवन का धन हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। हमारी संस्कृति तो सभी जीवों में ईश्वर की उपस्थिति देखती है।

बेटियों की बढ़ती भागीदारी को बताया शुभ संकेत

राष्ट्रपति ने मंच से विशेष रूप से छात्राओं की संख्या पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, यह अत्यंत शुभ संकेत है कि बेटियां अब पशु चिकित्सा जैसे क्षेत्र में भी बढ़-चढ़कर आ रही हैं। हमारी माताएं-बहनें परंपरागत रूप से पशुओं से जुड़ी रही हैं, और अब बेटियों का जुड़ाव इस क्षेत्र को नई संवेदनशीलता देगा।

संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियों को सराहा

1889 में स्थापित इस संस्थान द्वारा विकसित टीकों, रोग-नियंत्रण कार्यक्रमों और जैव विविधता संरक्षण में किए गए कार्यों की राष्ट्रपति ने मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने  रोकथाम उपचार से बेहतर वाली सोच को विशेष महत्व देते हुए इसे पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी पूर्णतः लागू करने की बात कही।

पशु संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में संस्थानों की भूमिका

गिद्धों की विलुप्ति जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने रासायनिक दवाओं के दुष्प्रभावों से सचेत रहने की सलाह दी और कहा कि ऐसे संस्थान जैव विविधता की रक्षा में आदर्श भूमिका निभा सकते हैं।

स्टार्टअप और स्वदेशी नवाचार की दी प्रेरणा

राष्ट्रपति ने संस्थान में संचालित पशु विज्ञान इनक्यूबेटर की प्रशंसा करते हुए विद्यार्थियों को स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, इससे आप न केवल रोजगार सृजित करेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और समाज में भी योगदान देंगे।

वन हेल्थ की अवधारणा को बताया आवश्यक

उन्होंने कहा कि मानव, पशु, वनस्पति और पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और इसी पर आधारित वन हेल्थ की अवधारणा अब वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रही है। पशु चिकित्सा इस दृष्टि से अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उपभोगवादी संस्कृति से आगाह किया

कोरोना महामारी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह संकट एक चेतावनी था कि उपभोग आधारित संस्कृति न केवल मनुष्यों बल्कि पशु, पर्यावरण और पूरी पृथ्वी को अकल्पनीय क्षति पहुँचा सकती है।

टेक्नोलॉजी से ला सकते हैं क्रांतिकारी बदलाव

राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे विज्ञान आगे बढ़ रहा है, पशु चिकित्सा क्षेत्र में जीन संपादन, भ्रूण स्थानांतरण, कृत्रिम गर्भाधान और आंकड़ा विश्लेषण जैसे माध्यमों से न केवल रोगों का निदान किया जा सकता है, बल्कि उन्हें सस्ता, स्थानीय और टिकाऊ भी बनाया जा सकता है।

समारोह में उप्र की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी आदि मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor