शारदा यूनिवर्सिटी में 22 को प्रिंसिपल्स’ कॉन्क्लेव 2025: शिक्षा व स्किलिंग की दिशा तय करने की पहल
आगरा। नई शिक्षा नीति 2020 और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के दौर में स्कूल शिक्षा किस दिशा में आगे बढ़े, इसी महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए शारदा यूनिवर्सिटी आगरा द्वारा 22 नवंबर को ‘प्रिंसिपल्स’ कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) जयंती रंजन ने शिक्षा के भविष्य, चुनौतियों, नवाचारों और स्किलिंग मॉडल पर होने वाले इस बहुआयामी संवाद की रूपरेखा विस्तार से साझा की।
उन्होंने बताया कि शारदा यूनिवर्सिटी में 22 नवंबर को दोपहर 12 बजे से एजुकेशन एंड स्किलिंग इन एन एरा ऑफ़ एनईपी टू थाउज़ेंड ट्वेंटी एंड एआई (Education & Skilling in an Era of NEP 2020 & AI) विषय पर आयोजित होने वाला प्रिंसिपल्स’ कॉन्क्लेव 2025 विद्यालय प्रधानाचार्यों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं को एक साझा संवाद-स्थल उपलब्ध कराने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बताया गया कि कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य विद्यालय शिक्षा को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप अधिक सक्षम, आधुनिक और कौशल-केंद्रित बनाना है। इस मंच के माध्यम से शिक्षा नेतृत्व को भविष्य की दिशा का स्पष्ट दृष्टिकोण मिलेगा। नीति और व्यवहारिक शिक्षा मॉडल पर सार्थक संवाद होगा। स्कूल–विश्वविद्यालय सहयोग के नए आयाम विकसित होंगे। शिक्षक प्रशिक्षण और स्किलिंग आधारित अधिगम को नई गति मिलेगी।
डॊ. जयंती नटराजन ने बताया कि कॉन्क्लेव में पैनल डिस्कशन, थीमैटिक सत्र, इंटरैक्टिव डायलॉग और विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवीन और शिक्षार्थी-केंद्रित बनाना है। कॉन्क्लेव के मुख्य वक्ता होंगे, सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक गांगुली, जो नई शिक्षा नीति और कौशल आधारित शिक्षा के भविष्य पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
शारदा विवि के चांसलर ने संदेश दिया कि यह कॉन्क्लेव स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरक पहल है। मुझे विश्वास है कि इस मंच से निकलने वाली सलाह और विचार शिक्षा जगत को नई दिशा देंगे। प्रो चांसलर श्री वाई.के. गुप्ता ने कहा कि यह कॉन्क्लेव स्कूल–विश्वविद्यालय साझेदारी और स्किलिंग आधारित शिक्षा को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। आउटरीच निदेशक साइबल चटर्जी ने भी विचार रखे।