ताजमहल की धरती पर गूंजा ‘प्राउड टू बी अ जैन’, मुनि समत्व सागर बोले-अपने सिर के ताज को पहचानें युवा

आगरा के ताज खेमा में श्रुत मंथन वर्षायोग समिति की ओर से ‘वंडरफुल जैनिज्म’ का भव्य सत्र आयोजित किया गया। मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को जैन धर्म के मूल्यों, आत्मविश्वास और अपनी पहचान पर गर्व करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर युवा के भीतर आगे बढ़ने की क्षमता है, जरूरत उसे पहचानने और सही दिशा में प्रयास करने की है। माउंट एवरेस्ट पर जैन ध्वज लेकर पहुंचने वाली यशी जैन, भारतीय वायु सेना के अधिकारियों, शिक्षाविदों और अन्य विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं ने ‘Proud to be a Jain’ का उद्घोष किया।

Oct 25, 2026 - 19:22
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ताजमहल की धरती पर गूंजा ‘प्राउड टू बी अ जैन’, मुनि समत्व सागर बोले-अपने सिर के ताज को पहचानें युवा
ताज खेमा, ताजमहल में आयोजित ‘वंडरफुल जैनिज्म’ के विशेष सत्र में जगत विख्यात ‘गूगल बाबा’ श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर जी महाराज और श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर जी महाराज जैनिज्म के महत्व पर बोलते हुए।

ताज खेमा में ‘वंडरफुल जैनिज्म’ का भव्य सत्र, एवरेस्ट विजेता यशी जैन समेत सेना, प्रशासन और शिक्षा जगत की हस्तियों का सम्मान, युवाओं को जैन दर्शन, संस्कार और आत्मविश्वास का संदेश

आगरा। ताजमहल की ऐतिहासिक धरती पर रविवार को जैन धर्म, आध्यात्मिकता, संस्कार और युवा शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। ताज खेमा, ताजमहल में आयोजित ‘वंडरफुल जैनिज्म’ के भव्य विशेष सत्र में युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ ‘Proud to be a Jain’ का उद्घोष किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को जैन दर्शन, आध्यात्मिक मूल्यों, आत्म-विकास और जीवन में सकारात्मक सोच की शक्ति से परिचित कराना रहा। देश के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली हस्तियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।

संत चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य भगवंत श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्यों—जगत विख्यात ‘गूगल बाबा’ श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर जी महाराज और श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में यह सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवा-युवतियों के साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। उत्साह का आलम यह रहा कि सभागार युवाओं से खचाखच भरा रहा।

‘पीछे ताजमहल है, लेकिन आपके सिर पर भी ताज है’

संयुक्त धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने की प्रेरणा दी। उन्होंने ताजमहल का उदाहरण देते हुए कहा कि आगरा की पहचान विश्वविख्यात ताजमहल से है, लेकिन यहां उपस्थित युवाओं के सिर पर भी एक ताज है, जिसे उन्हें पहचानना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि पीछे ताजमहल दिखाई दे रहा है, लेकिन उनके सामने बैठे युवाओं के सिर पर भी ताज नजर आ रहा है। उनका संदेश था कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर संभावनाएं और क्षमताएं मौजूद हैं। जरूरत केवल उन्हें पहचानने, निखारने और सही दिशा में आगे बढ़ने की है।

उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने के बाद व्यक्ति गर्व के साथ अपने देश का तिरंगा उठाता है। इसी तरह युवाओं को अपनी धार्मिक पहचान और संस्कारों पर भी गर्व होना चाहिए। उन्होंने जैन धर्म के मूल्यों को जीवन में अपनाने और अपनी पहचान को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

खुद को शून्य मत समझिए

मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को समझाया कि कई बार व्यक्ति अपनी क्षमताओं को कम आंकता है और स्वयं को कुछ भी नहीं समझता। उन्होंने शून्य का उदाहरण देते हुए कहा कि अकेले शून्य का मूल्य भले ही सीमित दिखाई दे, लेकिन सही स्थान पर जुड़ने से उसकी उपयोगिता और मूल्य कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में सही मार्गदर्शन, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच मिलने पर सामान्य समझा जाने वाला व्यक्ति भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकता है। युवाओं को अपनी कमजोरियों से निराश होने के बजाय अपनी क्षमताओं को पहचानना चाहिए और लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

मुनिश्री ने कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भी कभी सामान्य युवाओं की तरह ही अपने जीवन की यात्रा शुरू करने वाले लोग थे। निरंतर प्रयास, अनुशासन और समर्पण से उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किए। उनकी यात्रा से युवा प्रेरणा ले सकते हैं।

एवरेस्ट विजेता यशी जैन समेत विशिष्ट हस्तियों का सम्मान

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को श्रुत मंथन वर्षायोग समिति की ओर से सम्मानित किया गया। इनमें दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर जैन धर्म का ध्वज लेकर पहुंचने वाली पर्वतारोही यशी जैन विशेष आकर्षण रहीं। उनकी उपलब्धि को जैन समाज के लिए गौरव और युवाओं के लिए प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया गया।

सम्मानित होने वाली अन्य प्रमुख हस्तियों में भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर कुलदीप जैन, स्क्वाड्रन लीडर नूपुर जैन, एमिटी विश्वविद्यालय के निदेशक अक्षय जैन, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एवं चंडीगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसके जैन, गाजियाबाद के सेवानिवृत्त कमिश्नर एसके जैन, डिप्टी सीएम डॉ. पीयूष जैन, लेफ्टिनेंट रोहित जैन और नासा से सेवानिवृत्त अनंत रॉय जैन शामिल रहे। इन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने युवाओं को यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के बीच सकारात्मक तालमेल स्थापित किया जा सकता है।

‘वंडरफुल जैनिज्म’ के नौ सत्रों के बाद भव्य आयोजन

मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ने अपने संबोधन में ‘वंडरफुल जैनिज्म’ के पहले आयोजित नौ सत्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगातार आयोजित सत्रों के माध्यम से युवाओं तक जैन धर्म के सिद्धांतों और जीवन मूल्यों को पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि क्या वे वास्तव में थक गए हैं या अपने भीतर नई ऊर्जा और चेतना का अनुभव कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने युवाओं को सक्रिय, जागरूक और संकल्पवान बने रहने के लिए प्रेरित किया।

मुनिश्री ने कहा कि ताजमहल को देखने के लिए दुनिया भर से लोग आगरा आते हैं, लेकिन यहां युवाओं का जैन धर्म के मूल्यों और उसकी विशेषताओं को समझने के लिए एकत्र होना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को धर्म के सिद्धांतों को केवल सुनने तक सीमित न रखने, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवनशैली में उतारने का संदेश दिया।

मंगलाचरण और पाद प्रक्षालन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं की ओर से प्रस्तुत मंगलाचरण से हुई। इसके बाद संजय जैन, जोधपुर और वीरेंद्र जैन शास्त्री ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया। संतों के सानिध्य में आयोजित इस धर्मसभा में श्रद्धा, आध्यात्मिकता और सामाजिक एकजुटता का वातावरण बना रहा। मंच संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों और अतिथियों का परिचय कराते हुए आयोजन को आगे बढ़ाया।

जैन मूल्यों से युवाओं को जोड़ने का प्रयास

श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के इस आयोजन में राजीव जैन (कपड़ा), चक्रेश जैन, विवेक जैन (कांटे वाले), सनी जैन, विनीत जैन, संभव जैन, युग जैन, हितेश जैन और मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समिति के सदस्य एवं सकल जैन समाज के लोग मौजूद रहे। आयोजन के माध्यम से युवाओं को जैन धर्म के सिद्धांतों, आध्यात्मिक चिंतन, आत्मानुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि से जोड़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने के साथ युवाओं को शिक्षा, अनुशासन, सेवा और अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए भी निरंतर प्रयास करना चाहिए।