राधाष्टमीः कमलपुष्प पर विराजीं वृषभान दुलारी, गोटापट्टी की राजस्थानी पोशाक में सजे गिरधर
आगरा। केले, आम, अशोक और पीपल के पत्तों के साथ गुलाब, गेंदा और रजनीगंधा जैसे देसी फूलों से सजा कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर सोमवार को राधाष्टमी पर्व पर भक्तिभाव से सराबोर रहा। हर तरफ श्रीराधा की महिमा गूंज रही थी। 27 दिन के मूलों में जन्मी राधारानी का विशेष अभिषेक 27 नदियों के जल कलश और 27 पुष्पों से कर मूल उतारे गए। गोटापट्टी की राजस्थानी पोशाक में सजी राधारानी की अलौकिक छवि और श्रीगिरधर के दर्शन कर भक्त भावविभोर हो उठे।
-27 पुष्प और 27 नदियों के जल से हुआ राधारानी का अभिषेक, श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर गूंजा राधे-राधे के जयकारों से
सुबह राधारानी की कथा में वृंदावन इस्कॉन मंदिर के प्रबोधानंद महाराज और आगरा इस्कॉन अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप ने बताया कि रावल गांव में कमलपुष्प पर प्रकट हुई राधारानी जन्मांध थीं और उन्हें पहली बार श्रीकृष्ण के दर्शन के साथ दृष्टि प्राप्त हुई। उन्होंने श्रीकृष्ण द्वारा राधारानी के लिए की गई मोतियों की खेती की कथा भी सुनाई।
संध्या काल में मृदंग और मंजीरों की मधुर ध्वनियों के बीच राधा-कृष्ण की पालकी निकाली गई। राधारानी की कमलपुष्प पर विराजमान अलौकिक झांकी को देख श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। पुष्पवर्षा कर भक्तों ने पालकी का स्वागत किया। राधारानी का महाअभिषेक कर महाआरती की गई। वातावरण में गूंजते राधे-राधे के जयकारों ने मंदिर परिसर को ब्रजधाम का स्वरूप दे दिया। बच्चों ने राधा-कृष्ण प्रसंगों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
इस अवसर पर सुशील अग्रवाल, सुनील मनचंदा, संजीव मित्तल, संजीव बंसल, अमरप्रकाश अग्रवाल, हरिदास, अदिति गौरांगी, आशु मित्तल, शाश्वत नन्दलाल, द्योति बंसल, राजेश उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।