बरसाना धाम में राधारानी का अलौकिक प्राकट्य: इन्द्रदेव की वर्षा संग भक्तिभाव का महासागर
बरसाना/मथुरा। बरसाना की गलियां रविवार को तड़के चार बजे उस क्षण की साक्षी बनीं, जब स्वयं प्रकृति ने भी मानो लाड़ली जी राधारानी के जन्म का उत्सव मनाया। राधाष्टमी पर जैसे ही मंदिर के पट खुले, गर्भगृह से प्रस्फुटित अलौकिक प्रकाश और आसमान से झरती वर्षा की बूंदों ने भक्तों को यह अनुभूति कराई कि इन्द्रदेव अपनी आराध्या का स्वागत कर रहे हैं। आकाश की गर्जना मंगलध्वनि बन उठी। बूंदें मंजीरा और मृदंग सी झंकार करने लगीं और राधा नाम के जयघोष से पूरा बरसाना धाम भक्ति रस में डूब गया।
इन्द्रदेव का वर्षा-संगीत और अभिषेक
रविवार सुबह जैसे ही राधाष्टमी का महोत्सव आरम्भ हुआ, अचानक आसमान से हल्की बूंदें झरने लगीं। श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य को देख भाव-विभोर हो उठे। सेवायतों द्वारा पंचामृत से राधारानी का अभिषेक किया जा रहा था और वर्षा की हर बूंद उस अभिषेक में आकाशीय आहुति देती प्रतीत हो रही थी। गर्भगृह से निकली प्रकाश किरणें और आकाशीय वर्षा मानो राधा जन्म का दिव्य संदेश सुना रही थीं।
भक्ति रस में डूबा बरसाना
बरसाना की गलियों में दूर-दराज़ से आए भक्त इस दिव्य क्षण के गवाह बने। महिलाएं मंगलगीत गाने लगीं, बच्चे वर्षा की फुहारों में थिरकने लगे और वृद्ध भक्तों ने इसे दिव्य संकेत बताया। कहा कि यह वर्षा कोई साधारण वर्षा नहीं, यह तो राधारानी के जन्म का ईश्वरीय अभिषेक है। मंदिर की परिक्रमा में राधा-नाम का गुणगान गूंजता रहा और पूरा ब्रह्मांचल पर्वत राधामय हो उठा।
राधारानी का भव्य जन्म-अभिषेक
सेवायत आचार्यों ने वेद मंत्रों के बीच राधारानी का अभिषेक दूध, दही, शहद, घृत, इत्र, 27 कुओं का जल, सप्त अनाज, सात फल और सात मेवा सहित पवित्र सामग्रियों से किया। अभिषेक के दौरान मिट्टी के बर्तन से बहती दूध की धारा और भक्तों की पुष्प वर्षा ने दृश्य को दिव्य बना दिया। सुबह 5:30 बजे राधारानी को पीले परिधान पहनाकर अलौकिक श्रृंगार कराया गया। इसके बाद भक्तों ने बरसाने वाली की जय और वृषभानु नंदिनी की जय के जयकारों से मंदिर प्रांगण गूंजा दिया।
पालना दर्शन और बृषभानोत्सव की बधाइयां
प्रातः 8 बजे राधारानी ने स्वर्ण-रजत निर्मित पालने में भक्तों को दर्शन दिए। नंदगांव से आए विप्रवरों ने पारंपरिक वेशभूषा में बधाई पद प्रस्तुत किए और बृषभानोत्सव में जमकर थिरके। श्रद्धालुओं ने उन्हें भेंट और प्रसादी देकर स्वागत किया। हर दिशा से उठती राधा नाम की ध्वनि और बधाई गीतों ने वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया।
बरसाना का यह दिव्य राधाष्टमी उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि जब भक्तिभाव अपने चरम पर हो, तो स्वयं प्रकृति भी उसमें सहभागी बन जाती है।