वंदे मातरम् गाते समय तीसरा अंतरा शुरू होते ही असहज हुए राहुल, खरगे और सोनिया गांधी, स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय से सामने आए वीडियो में साफ दिख रही कांग्रेस नेताओं की नाराजगी
नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। ध्वजारोहण के बाद छह अंतरों वाले वंदे मातरम् का गायन शुरू हुआ। शुरुआती दो अंतरों के दौरान सब सामान्य रहा, लेकिन तीसरे अंतरे से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के असहज होने के हावभाव और आपसी बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़े हो गया। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गायन रोकने का कोई प्रयास नहीं हुआ और सोनिया गांधी ने केवल लंबे समय से खड़े खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कहा था।
तीसरा अंतरा शुरू होते ही बदला माहौल
कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् का गायन शुरू हुआ। पहले दो अंतरे सामान्य रूप से गाए गए। इसके बाद तीसरा अंतरा शुरू होते ही सामने आए वीडियो में राहुल गांधी को मुड़कर इधर-उधर देखते लगे, जबकि सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को आपस में बातचीत करते हुए बहुत परेशान हाल में देखा गया। तीसरे से छठवें अंतरे के गायन के लिए केवल 2 मिनट पांच सेकेंड का समय लगना था, लेकिन खरगे और सोनिया गांधी इतना भी धैर्य नहीं रख सके। गायन के दौरान ही उन्होंने कांग्रेस सेवादल के एक नेता को बुलाया। उनके बातचीत के हावभाव से ऐसा लगा कि वे वंदे मातरम का पूरा गायन होने पर आपत्ति जताते हुए इसे रोकने के लिए कह रहे थे, क्योंकि इसी दौरान राहुल गांधी की टीम के एक सदस्य तीन उंगलियां उठाकर इशारा करते हैं कि ये तीन मिनट में पूरा होगा। वीडियो में सोनिया गांधी के चेहरे पर गुस्से के भाव भी दिखाई दे रहे हैं।
इसी दौरान कांग्रेस के अन्य नेता वंदे मातरम् के गायन के दौरान सावधान की मुद्रा में खड़े रहे। इनमें अजय माकन समेत पार्टी के कई नेता शामिल थे। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
सोनिया और खरगे के हावभाव पर भाजपा के सवाल
भाजपा नेताओं ने वीडियो के आधार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेता वंदे मातरम् के पूरे गायन को लेकर सहज नहीं थे। भाजपा की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व पूर्ण वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक संदेश देना चाहता है।
वीडियो में नेताओं के बीच हुई बातचीत स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती। इसलिए उनके हावभाव और बातचीत के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
कांग्रेस बोली- गायन रोकने की कोशिश नहीं हुई
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने पार्टी की ओर से सफाई दी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का गायन रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उनके अनुसार, सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के काफी देर तक खड़े रहने को लेकर चिंतित थीं और उन्होंने उनके लिए कुर्सी लाने का संकेत दिया था। कांग्रेस के मुताबिक वंदे मातरम् का पूरा गायन हुआ और इसे बीच में रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
कुर्सी की सफाई पर भी उठे सवाल
कांग्रेस की सफाई के बाद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। भाजपा और कांग्रेस के आलोचकों ने सवाल उठाया कि यदि सोनिया गांधी खरगे के लिए कुर्सी मंगाने की बात कर रही थीं तो कार्यक्रम के दौरान कुर्सी पहुंची क्यों नहीं। यह सवाल भी उठाया गया कि गीत पूरा होने में दो मिनट का ही समय शेष था, ऐसे में खरगे क्या कुछ देर और खड़े नहीं रह सकते थे। यही नहीं, गायन पूरा होने के बाद भी काफी देर तक खरगे खड़े ही रहे, इसलिए जयराम रमेश की सफाई किसी के गले नहीं उतर रही।
इसी वजह से सोनिया गांधी और खरगे की बातचीत को लेकर सामने आए वीडियो की अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं।
गायन के बाद भी हुई बातचीत
वंदे मातरम् का गायन समाप्त होने के बाद सामने आए एक अन्य वीडियो में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कांग्रेस सेवादल के एक नेता से खंभे के पीछे खड़े होकर बातचीत करते देखा गया। इस दृश्य को भी राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस बातचीत में क्या कहा गया, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह माना जा रहा है कि दोनों द्वारा कांग्रेस सेवादल के नेता से वंदे मातरम का पूरा गायन कराने को लेकर सवाल जवाब किया जा रहा था।
छह अंतरों का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में
वंदे मातरम् के छह अंतरों के गायन को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब इसके पूर्ण संस्करण को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस पहले से चल रही है। लंबे समय से राष्ट्रीय आयोजनों में आम तौर पर वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों का ही गायन प्रमुख रूप से किया जाता रहा है।
1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने राष्ट्रीय आयोजनों के लिए वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरों को स्वीकार किया था। बाद के अंतरों में मुस्लिम समाज की की आपत्तियों के चलते यह व्यवस्था व्यापक रूप से अपनाई गई थी।
अब छह अंतरों के पूर्ण गायन को लेकर नए प्रावधानों और सरकारी दिशा-निर्देशों के बीच कांग्रेस मुख्यालय का यह घटनाक्रम पुराने विवाद को फिर राजनीतिक बहस में ले आया है।
राष्ट्रगीत पर फिर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामने आए वीडियो ने भाजपा को कांग्रेस पर राष्ट्रगीत को लेकर नया हमला करने का मौका दे दिया है। भाजपा इसे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के रवैये से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है।
फिलहाल विवाद का केंद्र वीडियो में दिखाई दे रहे हावभाव, सोनिया गांधी और खरगे की बातचीत तथा उसके पीछे की मंशा को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक दावे हैं। कांग्रेस की सफाई के बावजूद यह मुद्दा स्वतंत्रता दिवस पर सियासी बहस का बड़ा विषय बन गया है।