आगरा के रामभक्त और सरकार श्रीराम की बहन शांता जी के सींगना स्थित ससुराल को भुलाए बैठे हैं

आगरा। भगवान श्रीराम के प्रति आगरावासियों की अगाध आस्था जगजाहिर है। चाहे रामलीला हो, जनकपुरी हो या फिर अयोध्या में बने भव्य श्रीराम मंदिर में सहयोग की बात, आगरा के लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। मगर यह विडंबना ही कही जाएगी कि उन्हीं भगवान श्रीराम की बहन शांता जी के आगरा स्थित ससुराल की ओर कोई मुड़कर भी नहीं देखता। जनपद के सींगना गांव में यह पौराणिक स्थल उपेक्षा की धूल में दबा पड़ा है।

Sep 3, 2025 - 13:34
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आगरा के रामभक्त और सरकार श्रीराम की बहन शांता जी के सींगना स्थित ससुराल को भुलाए बैठे हैं
सींगना गांव स्थित श्रृंगी ऋषि का आश्रम, जो प्रभु श्रीराम की बहन शांता जी का ससुराल है।

-रुनकता से आगे सींगना गांव में ऋंगी ऋषि का आश्रम है श्रीराम की बहन का ससुराल 

प्रभु श्रीराम की बहन शांता जी का ससुराल सींगना गांव में स्थित श्रंगी ऋषि आश्रम है। जी हां, शांता जी का विवाह श्रंगी ऋषि के साथ हुआ था। यह प्राचीन आश्रम आज खंडहर जैसी स्थिति में है। इस आश्रम के विकास की बातें तो बहुतरी हुईं, लेकिन ये बातें सिर्फ बातों तक ही सीमित रहीं।

अब जबकि आगरा में ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव का आगाज होने वाला है, लोकस्वर संस्था ने इस धरोहर की ओर समाज, खासकर रामभक्तों का ध्यान खींचते हुए इसके संरक्षण और विकास की पहल की है। संस्था का मानना है कि यह स्थल न केवल धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए पवित्र धरोहर है, बल्कि आगरा की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई भी दे सकता है।

पौराणिक महत्व और सींगना गांव का रिश्ता

इतिहास और धर्मग्रंथों में वर्णित है कि राजा दशरथ और रानी कौशल्या की ज्येष्ठ संतान शांता जी को अंगदेश के राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्षिणी ने गोद लिया था। वर्षिणी रानी कौशल्या की ही बहन थीं और निःसंतान थीं। गोद लिए जाने के बाद शांता जी अंगदेश की राजकुमारी बन गई थीं। ऋंगी ऋषि के साथ विवाह उपरांत शांता जी का ससुराल आगरा जिले का सींगना गांव बना, जो आज भी उनके पौराणिक संबंधों का गवाह है। गांव में श्रंगी ऋषि का आश्रम आज भी है। इस स्थल का भगवान राम से प्रत्यक्ष जुड़ाव और इसका इतना बड़ा महत्व होने के बावजूद यह स्थल आज भी आम जनमानस की नजरों से दूर है।

लोकस्वर संस्था की मांग

लोकस्वर संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है कि जिस धरोहर को आगरा गर्व से विश्व पटल पर रख सकता है, वह आज गुमनामी और उपेक्षा का शिकार है। उन्होंने कहा, जब पूरा देश राममय वातावरण में डूबा हुआ है, तब शांता जी के ससुराल स्थल का उपेक्षित रहना बेहद पीड़ादायक है। श्री रामलीला महोत्सव और जनकपुरी महोत्सव में सिंगना गांव को जोड़कर इस धरोहर का गौरव लौटाना ही समय की मांग है।

धरोहर संरक्षण की पहल

लोकस्वर ने इस पौराणिक आश्रम के विकास के लिए पर्यटन और संस्कृति विभाग से सींगना गांव को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित करने की अपील की है। इसके लिए उन्होंने विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम को भी एक पत्र भेजा है। इसके साथ ही जूता उद्योग से जुड़े स्थानीय उद्योगपतियों को भी इस स्थल के जीर्णोद्धार अभियान से जुड़ने का आग्रह किया गया है, ताकि निजी सहयोग से गांव का सौंदर्यीकरण हो सके। बता दें कि सींगना गांव को ही आगरा के जूता उद्यमियों अपना मुख्य केंद्र बनाया हुआ है। यहां हर साल बड़ा आयोजन भी होता है।

लोक स्वर अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि शांता जी का एक प्राचीन चित्र रामपुर की ऐतिहासिक रज़ा लाइब्रेरी में सुरक्षित है, जिसे नवाब काल से ही धरोहर स्वरूप सहेजकर रखा गया है। यह उदाहरण बताता है कि अगर चाह हो तो धरोहरें संजोई जा सकती हैं। इसके लिए रामपुर का नवाब परिवार भी बधाई का पात्र है।

जनप्रतिनिधियों को भेजा गया निवेदन

लोकस्वर संस्था ने इस मांग को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक पहुंचाया है। इनमें क्षेत्रीय सांसद राजकुमार चाहर, क्षेत्रीय विधायक चौधरी बाबूलाल, प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति विभाग मुकेश मेश्राम (आईएएस), एफमैक के संरक्षक पून डावर, श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, जनकपुरी आयोजन समिति के अध्यक्ष मुरारी प्रसाद अग्रवाल, इस बार के रामलीला और जनकपुरी महोत्सव में राजा दशरथ स्वरूप  व राजा जनक स्वरूप  को शामिल किया गया है। संस्था को उम्मीद है कि इन प्रतिनिधियों के सहयोग से सींगना गांव का विकास कार्य गति पकड़ सकेगा।

आगरावासियों से अपील

लोकस्वर संस्था ने विशेष रूप से आगरावासियों से आह्वान किया है कि वे ताजमहल जैसी अंतरराष्ट्रीय पहचान से आगे बढ़कर अपनी रामायण धरोहर को भी पहचान दिलाएं। यदि आगरा मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाता है, तो सींगना गांव न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकेंगी कि भगवान राम की बहन शांता जी का ससुराल हमारी ही धरती पर है।

आगरावासियों को यह भी याद रखना चाहिए कि धरोहर केवल स्मारक नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ी विरासत होती है। अब समय आ गया है कि सींगना स्थित ऋंगी ऋषि आश्रम को सांस्कृतिक आयोजनों में स्थान देकर उसे उसकी वास्तविक पहचान लौटाई जाए।

संस्था को विश्वास है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को आगे बढ़ाकर सींगना गांव को पर्यटन मानचित्र और आगरा की रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनाएंगे। संस्था का कहना है कि अगर सरकार और समाज मिलकर पहल करें तो यह स्थल आने वाले समय में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor