भरतपुर की धरती से उठी जाट आरक्षण की गर्जना, हनुमान बेनीवाल ने भरी हुंकार
आगरा/भरतपुर। देशभर के 9 राज्यों में जाट समाज को केंद्रीय आरक्षण से वंचित रखने के विरोध में अब जाट समाज ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राजस्थान के नागौर से सांसद एवं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने भरतपुर जिले के ढहरा मोड़ पर आयोजित जाट आरक्षण हुंकार रैली में हुंकार भरी कि यदि राज्य स्तर पर जाट समाज को पिछड़ा वर्ग माना गया है तो केंद्र सरकार उन्हें केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण क्यों नहीं दे रही?
दिल्ली मार्च का ऐलान: एक लाख जाट समाज के लोग होंगे शामिल
भरतपुर में हुई जाट आरक्षण रैली की एक झलक।
हनुमान बेनीवाल ने भारी बारिश के बीच रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भरतपुर, धौलपुर, डीग और उत्तर प्रदेश के जाट समाज को आरक्षण दिलाने के लिए मैं एक महीने बाद दिल्ली में एक लाख जाटों के साथ आंदोलन करूंगा। उन्होंने साफ कहा कि यह अन्याय और भेदभाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, हाथरस सहित विभिन्न जिलों में भी आरक्षण हुंकार रैलियां की जाएंगी।
सांसद संजना जाटव और पूर्व विधायक प्रताप चौधरी भी उतरे मैदान में
भरतपुर से लोकसभा सांसद संजना जाटव ने भी इस रैली में छह घंटे बारिश में डटे रहकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा, मैंने संसद में जाट आरक्षण का मुद्दा उठाया है, लेकिन केंद्र सरकार टालमटोल कर रही है। जाट समाज के संघर्ष में मैं हर कदम पर साथ हूं।
अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और भरतपुर-धौलपुर के जाटों की मांग समान है, इसलिए यह लड़ाई अब मिलकर लड़ी जाएगी।
सात घंटे की रैली, चार घंटे बेनीवाल का किया गया इंतजार
रैली सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक बारिश के बीच चली। हनुमान बेनीवाल के पहुंचने तक कार्यकर्ताओं ने चार घंटे तक प्रतीक्षा की। आयोजन की जिम्मेदारी संयोजक चौ. नैम सिंह फौजदार ने निभाई।
आगरा से भी पहुचे जाट समाज के प्रतिनिधि
जाट महासभा के जिला महामंत्री वीरेन्द्र सिंह छौंकर ने बताया कि आगरा से भारी संख्या में पदाधिकारी भरतपुर की रैली में शामिल हुए, जिनमें कप्तान सिंह चाहर (जिलाध्यक्ष जाट महासभा) चौ. मान सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष, पूर्व ब्लॉक प्रमुख), नेम सिंह (राष्ट्रीय सचिव, आरएलपी), नरेश इंदौलिया (प्रदेश उपाध्यक्ष, युवा जाट महासभा), लखन चौधरी, जी.डी. चाहर, जय प्रकाश चाहर, भूपेंद्र सिंह राणा, नवल सिंह, सत्यवीर रावत, नैपाल सिंह राणा, तोरन सिंह चाहर, कुशलपाल सिंह, मानवेंद्र सोलंकी, नटवर चाहर, केपी चाहर आदि प्रमुख थे।
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