हिंद महासागर की सुरक्षा पर सामूहिक संकल्प — गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव 2026 में 14 देशों की नौसेनाओं ने बनाई साझा रणनीति
पणजी (गोवा)। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री चुनौतियों के बीच गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव 2026 में समुद्री सुरक्षा, सहयोग और कूटनीति को नई दिशा देने पर व्यापक मंथन हुआ। इस पांचवें संस्करण के सम्मेलन में भारत समेत हिंद महासागर क्षेत्र के 14 देशों के नौसेना प्रमुखों और वरिष्ठ समुद्री अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य साझा प्रयासों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना, उभरते खतरों का सामूहिक समाधान निकालना और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत बनाना रहा।
सम्मेलन का उद्घाटन एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, इसलिए इनके समाधान के लिए तकनीकी सहयोग, सूचना साझा करने और आपसी तालमेल को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार की रीढ़ बताते हुए सामूहिक रणनीति अपनाने पर जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान कई गंभीर और समसामयिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अवैध, अनियमित और बिना अनुमति के मछली पकड़ने को समुद्री संसाधनों और आर्थिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया गया। समुद्री मार्गों से हो रही नशीले पदार्थों की तस्करी पर चिंता जताते हुए इससे निपटने के लिए साझा निगरानी और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की आवश्यकता रेखांकित की गई।
इसके साथ ही समुद्री अपराधों से निपटने के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स के गठन, वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली और चेतावनी तंत्र विकसित करने पर भी विचार हुआ। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कहा कि यदि रियल टाइम इंटेलिजेंस साझा की जाए तो समुद्री अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
इस सम्मेलन में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, कोमोरोस, मलेशिया, केन्या, सिंगापुर, मेडागास्कर, थाईलैंड, म्यांमार, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, श्रीलंका और तंजानिया की नौसेनाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी देशों ने अपने अनुभव साझा करते हुए समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और साझा अभ्यासों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
समापन सत्र में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि एक संयुक्त समुद्री सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो आपसी सहमति और साझेदारी पर आधारित हो। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में समन्वय, क्षमता निर्माण और सुरक्षा ढांचे को और मजबूती मिलेगी। भारत ने इस दिशा में साझेदार देशों को प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया।
हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्व का बड़ा समुद्री व्यापार और तेल परिवहन इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है। गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव जैसे मंच समुद्री अपराधों, अवैध गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए साझा जिम्मेदारी और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।