परमाणु मोर्चे पर नई होड़, अमेरिका का दावा- चीन बना रहा है अगली पीढ़ी के गुप्त न्यूक्लियर हथियार
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि चीन अगली पीढ़ी के उन्नत परमाणु हथियार विकसित कर रहा है और 2020 में लोप नूर में गुप्त परीक्षण किया था। इन हथियारों में मल्टी-वॉरहेड मिसाइल और टैक्टिकल न्यूक्लियर सिस्टम शामिल हो सकते हैं। चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका पर राजनीतिक दुष्प्रचार का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम से वैश्विक और एशियाई सुरक्षा संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अलर्ट
वाशिंगटन। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि चीन तेजी से अगली पीढ़ी के परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। वह भी ऐसी तकनीक के साथ, जो फिलहाल यूनाइटेड स्टेटस और रूस के पास भी नहीं है। इस खुलासे के बाद वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर नई बहस शुरू हो गई है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
लोप नूर में ‘खुफिया’ परीक्षण का दावा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, चीन ने जून 2020 में अपने उत्तर-पश्चिम स्थित लोप नूर परीक्षण स्थल पर एक गुप्त विस्फोटक परीक्षण किया था। यह जानकारी जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान अमेरिका के हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी थॉमस डिनानो ने सार्वजनिक की थी। हालांकि चीन 1996 से औपचारिक रूप से परमाणु परीक्षणों पर स्वैच्छिक रोक की बात करता रहा है, लेकिन अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि यह परीक्षण नई पीढ़ी के हथियारों के विकास से जुड़ा था।
मल्टी-वॉरहेड मिसाइल और टैक्टिकल हथियारों पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, चीन ऐसे सिस्टम विकसित कर रहा है जो एक ही मिसाइल से कई छोटे परमाणु वॉरहेड (MIRV तकनीक) दाग सकें। इसके साथ ही कम क्षमता वाले टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों के विकास की भी आशंका जताई गई है, जो सीमित क्षेत्रीय संघर्ष में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हथियारों की तैनाती एशिया-प्रशांत में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है, खासकर ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच।
परमाणु जखीरे में तेज़ी से बढ़ोतरी
चीन 1964 से परमाणु शक्ति संपन्न देश है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों का आकलन है कि चीन ने हाल के वर्षों में अपने वॉरहेड की संख्या में तेज़ी से वृद्धि की है। हालांकि कुल संख्या अभी भी अमेरिका और रूस से कम मानी जाती है, लेकिन विकास की रफ्तार ने पश्चिमी देशों को चिंतित कर दिया है।
चीन का पलटवार: “अमेरिका का राजनीतिक दुष्प्रचार”
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने अमेरिकी दावों को “तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश” बताया। उनका कहना है कि अमेरिका अपने परमाणु वर्चस्व को बनाए रखने और निरस्त्रीकरण की जिम्मेदारियों से बचने के लिए चीन को बदनाम कर रहा है। चीन ने यह भी कहा कि वह अमेरिका द्वारा परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने के किसी भी बहाने का कड़ा विरोध करेगा।
भारत और एशिया पर संभावित असर
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चीन वास्तव में टैक्टिकल और मल्टी-वॉरहेड तकनीक में बढ़त बना लेता है, तो इसका असर एशियाई सुरक्षा समीकरण पर पड़ सकता है। भारत सहित कई देश इस विकास पर करीबी नजर रखे हुए हैं।