अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बहुत बड़ा झटका, अवैध करार देकर विदेशी टैरिफ किये रद्द, कहा- राष्ट्रपति ने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया

अमेरिका की शीर्ष न्यायिक संस्था अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी घोषित करते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि टैरिफ लगाने के मामले में राष्ट्रपति ने अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।

Feb 20, 2026 - 21:46
Feb 20, 2026 - 21:46
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बहुत बड़ा झटका, अवैध करार देकर विदेशी टैरिफ किये रद्द, कहा- राष्ट्रपति ने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया

वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिन टैरिफ को राष्ट्रीय आपात स्थिति से जुड़े कानूनों के तहत लागू किया था, वे संविधान के अनुरूप नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को प्राप्त है।

कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपात स्थितियों में सीमित शक्तियों के उपयोग के लिए बनाए गए कानूनों का सहारा लेकर कई देशों पर व्यापक और दीर्घकालिक टैरिफ लगाए, जो कानून की मंशा के विपरीत है। फैसले में कहा गया कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू करना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक और विदेश नीति का एक प्रमुख हथियार बनाया था। रिपब्लिकन नेता ने इन टैरिफ को अमेरिकी आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताते हुए दावा किया था कि इनके बिना अमेरिका की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

कोर्ट के इस फैसले का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश की कड़ी टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया है कि वह असीमित मात्रा, अवधि और दायरे में अपने दम पर टैरिफ लगा सकते हैं। इतना व्यापक और संवैधानिक प्रभाव वाला अधिकार प्रयोग करने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस से स्पष्ट अनुमति दिखानी होगी।

कोर्ट ने अपने निर्णय में दोहराया कि कांग्रेस ही वह संस्था है जिसे संविधान ने टैक्स और शुल्क लगाने की शक्ति सौंपी है, और कार्यपालिका इस अधिकार को अपने स्तर पर नहीं छीन सकती।

इस फैसले को अमेरिका में शक्तियों के संतुलन (चेक एंड बेलेंस) की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिसने राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियों पर स्पष्ट संवैधानिक सीमा खींच दी है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक अहम संदेश दिया है कि आर्थिक राष्ट्रवाद की नीतियां भी संवैधानिक सीमाओं से ऊपर नहीं हो सकतीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ रद्द होने से अमेरिका की संरक्षणवादी नीति को बड़ा झटका लगा है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता कम होने और मुक्त व्यापार को बल मिलने की संभावना है। यूरोप, चीन और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह फैसला संकेत है कि अमेरिकी व्यापार नीतियां अब अधिक संस्थागत नियंत्रण में रहेंगी, जिससे निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।

भारत के लिहाज से यह फैसला खास तौर पर सकारात्मक माना जा रहा है। भारत के आईटी, फार्मा, स्टील और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर अमेरिकी टैरिफ नीति से सीधे प्रभावित होते रहे हैं। टैरिफ हटने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में स्थिरता आएगी। साथ ही, यह फैसला वैश्विक स्तर पर नियम-आधारित व्यापार प्रणाली को मजबूत करता है, जो भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के दीर्घकालिक हित में है।

SP_Singh AURGURU Editor