एसएन के डॉक्टरों ने पुलिसकर्मियों को दी बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग

आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज की टीम द्वारा आज पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों को बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) का प्रशिक्षण दिया गया। 

Nov 7, 2024 - 17:08
 0
एसएन के डॉक्टरों ने पुलिसकर्मियों को दी बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग
आगरा पुलिस लाइन में गुरुवार को पुलिसकर्मियों को बेसिक लाइफ सपोर्ट् की ट्रेनिंग देने वाले डाक्टरों की टीम।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में सही समय पर और तुरंत मदद कैसे दी जा सकती है, ताकि किसी की जान बचाई जा सके। इस प्रशिक्षण के दौरान सभी को "हर कोई किसी की जिंदगी बचाने में मदद कर सकता है" की भावना को सशक्त रूप से प्रेरित किया गया।

इस प्रशिक्षण में बीएलएस  के तीन मुख्य घटक रक्त प्रवाह, वायुमार्ग और सांस लेने के बारे में विस्तार से सिखाया गया। इनका सही तरीके से उपयोग करना बेहद आवश्यक होता है, खासकर जब किसी व्यक्ति को दिल का दौरा या सांस लेने में कठिनाई हो रही हो।

वायुमार्ग की देखभाल करना

अधिकारियों को डॉ. योगिता द्विवेदी द्वारा सिखाया गया कि किसी भी आपात स्थिति में वायुमार्ग को कैसे साफ और खुला रखा जा सकता है, ताकि व्यक्ति की श्वास प्रक्रिया सामान्य बनी रहे। खाने का कण या अन्य बाहरी वस्तु गले में फंसने की स्थिति में इसे हटाने के लिए सही तकनीक का अभ्यास कराया गया। इसे हेमलिच मैनुवर कहते हैं, जिसमें पेट पर दबाव डालकर फंसी हुई वस्तु को बाहर निकाला जाता है।

सीपीआर देना और इसका महत्व

सीपीआर या कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन देने का सही तरीका डाक्टर अनुभव द्वारा सिखाया गया। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें छाती पर दबाव डालकर दिल के दौरे के शिकार व्यक्ति को कृत्रिम श्वास दी जाती है, जिससे उसके शरीर में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बना रहता है। 

अधिकारियों को सीपीआर देने का सही तरीका - छाती पर दबाव देना, श्वास देना, और क्रमबद्ध तरीके से इस प्रक्रिया का पालन करना सिखाया गया। समय पर सीपीआर देने से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।

एईडी डिवाइस और इसका उपयोग

एईडी (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर) एक स्वचालित उपकरण है, जो दिल की धड़कन को सामान्य करने के लिए बिजली के झटके का उपयोग करता है। डॉ. सी.पी. गौतम ने बताया कि किस प्रकार इस उपकरण का सही समय पर और सही तरीके से उपयोग करना व्यक्ति की जान बचाने में सहायक हो सकता है। अधिकारियों को इस डिवाइस का उपयोग करने की बारीकियां भी सिखाई गईं।

गोल्डन ऑवर का महत्व

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. करण रावत ने "गोल्डन ऑवर" के महत्व पर भी विशेष ध्यान दिए  जाने की बात कही। गोल्डन ऑवर वह महत्वपूर्ण समय है, जिसमें अगर समय पर उपचार मिल जाए तो व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है और उसे स्थाई क्षति से बचाया जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान सभी अधिकारियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया, ताकि वे इस प्रक्रिया को और अच्छे से समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ इसका उपयोग कर सकें। 

कार्यक्रम का नेतृत्व एसएन मेडिकल कॉलेज की अनुभवी टीम के साथ टेक्नीशियन मैं  गौरांश शर्मा, पवन कुमार, ईशू, मोनू, कृष्णकांत मौजूद रहे एवं कार्यक्रम में वरिष्ठ ऑर्थोपेडिशियन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आगरा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डी.वी. शर्मा भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपने ज्ञान और अनुभव साझा किए।

SP_Singh AURGURU Editor