संस्कार भारती की नमन काव्य गोष्ठीः कागज-मोबाइल देखकर काव्यपाठ से बचें कवि, कंठस्थ रचना ही श्रोताओं पर छोड़ती है गहरी छाप : बांकेलाल गौड़
आगरा। संस्कार भारती की 21वीं नमन काव्य गोष्ठी में काव्यपाठ की प्रस्तुति को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। संस्कार भारती के अखिल भारतीय अधिकारी एवं प्रचारक माननीय बांकेलाल गौड़ ने कहा कि कवियों को कागज या मोबाइल पर देखकर काव्यपाठ करने से बचना चाहिए। काव्य को कंठस्थ कर भाव और लय के साथ प्रस्तुत करने से रचना का प्रभाव श्रोताओं तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचता है।
आयोजन समिति आगरा पश्चिम, आगरा महानगर, ब्रज प्रांत द्वारा माधव भवन, जयपुर हाउस में आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। बांकेलाल गौड़, आचार्य यादराम सिंह कविकिंकर, वरिष्ठ कवि अशोक गोयल, वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डॉ. ब्रज बिहारी लाल बिरजू तथा प्रांतीय महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग ने दीप प्रज्वलित किया।
वरिष्ठ कवि अशोक गोयल ने सरस्वती वंदना का सस्वर गायन किया और काव्यपाठ करते हुए कहा—
हम सद्गुणों संस्कारों का कुछ आचमन करें, आपस में खुशियां बांटकर सुरभित चमन करें।
संस्कृति सनातन की सजग संस्था जो श्रेष्ठ है, उस संस्कार भारती को हम शत-शत नमन करें।
कवि राकेश शर्मा दद्दू ने प्रेम की परीक्षा पर अपनी पंक्तियां प्रस्तुत कीं—
जाने क्यों जागृत हुई मन में ऐसी आस,
प्रेम परीक्षा बिन दिए हो जाऊंगा पास।
ब्रज भाषा के वरिष्ठ कवि डॉ. ब्रज बिहारी लाल बिरजू ने संगीतबद्ध एकल काव्यपाठ कर श्रोताओं को रसविभोर कर दिया—
तुम संभाले रहो अपने हथियार को, हम भी तैयार हैं झेलने वार को।
रस में विष घोलते ही रहो तुम मगर, हम निभाते हैं वादा किए प्यार को।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं वरिष्ठ कवयित्री डॉ. नीलम भटनागर ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया—
मिटें दूरियां, पटें खाइयां, दिल मिले, प्रेय से श्रेय की ओर कदम बढ़े,
काम से अकाम की राह पर बढ़े, स्व को पहचान समरस हो जाएं।
कवि प्रभुदत्त उपाध्याय ने श्रीकृष्ण को ब्रज लौटने का भावपूर्ण आमंत्रण दिया—
श्री कृष्ण फिर से ब्रज में आ जाओ, तान मुरली की सुना जाओ,
ये ब्रज तुम्हारे बिन बहुत ही सूना है, आके सूनापन मिटा जाओ।
कवि रूपेश कुलश्रेष्ठ स्नेह ने मन की पीड़ा को शब्द दिए—
टूटे तन तो बोल भी दूं, पर टूटा मन तो क्या मैं बोलूं,
परछाईं जब पहरा दे तो मन की उलझन क्या मैं खोलूं।
एकल काव्यपाठ करते हुए राजीव क्वात्रा आगरावासी ने देशभक्ति की ओजपूर्ण पंक्तियां सुनाईं—
भारत मां के जयकारों में विकट यातना भूल गए, जाने कितने अंग्रेजों की आंखों का बन शूल गए,
राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह चूम के फंदा झूल गए।
कवि डॉ. यशोयश ने बेटियों के संरक्षण और शिक्षा का संदेश दिया—
बेटियां हैं घर-परिवार की सगुन शोभा, कोख में सिसक रहीं बेटियां, बचाओ तुम,
देश, संस्कृति और सभ्यता हैं बेटियां, बेटियां बचाओ और बेटियां पढ़ाओ तुम।
एकल काव्यपाठ करते हुए चित्रकार एवं कवयित्री रश्मि सिंह ने अपनी रचना प्रस्तुत की—
कुछ भी लिख लेने की जिद में कुछ भी न लिख सकी, शब्द सिसक कर रह गए,
अक्षर के ‘अ’ को न छू सकी, शब्दों की पीड़ा मन में ही रह गई।
कवि प्रणव कुमार कुलश्रेष्ठ, टूंडला ने बदलते पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्गों की स्थिति पर कहा—
कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, कुछ बदलें दाना-पानी, बुजुर्ग क्यों जाएं कहीं पर, मान लीजिए घर बैठे हैं ज्ञानी।
बच्चे कम का नारा देकर चाचा, ताऊ, बुआ, रिश्तों को पाट दिया, गगन सितारे महल बनाकर दादा-दादी को बांट दिया।
डा. मंजू स्वाति ने राम-सीता प्रसंग के माध्यम से विश्वास और दांपत्य की भावनाओं को अभिव्यक्त किया—
था विरह कारत मेरा मन और उस पर ये घड़ी, सामने रघुवर खड़े पर बीच अग्नि है जल रही,
इस तरफ सीता खड़ी और सोचने मन में लगी, विश्वास गर मुझ पर नहीं तो कैसे हूं अर्द्धांगिनी?
काव्य गोष्ठी में संस्कार भारती के अखिल भारतीय अधिकारी एवं प्रचारक माननीय बांकेलाल गौड़, विजया तिवारी, राष्ट्रीय ओजकवि मोहित सक्सेना, हिरेन्द्र नरवार हृदय, पूर्व एडीएम यादराम सिंह कविकिंकर, प्रकाश गुप्ता बेबाक, प्रांतीय महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग, अलका शर्मा, आचार्य उमाशंकर पाराशर, संजय कुमार एडवोकेट, चंद्रशेखर शर्मा ग्रीनमैन, मोहिनी भटनागर, आरती शर्मा, वन्दना तिवारी, रूपेश कुलश्रेष्ठ स्नेह, राकेश शर्मा दद्दू, रामेन्द्र शर्मा रवि, इंजीनियर हरीश कुमार सिंह भदौरिया, सुधीर कुलश्रेष्ठ, डॉ. राजीव शर्मा निस्पृह, योगेश चन्द्र शर्मा योगी, लोकगीतों की कवयित्री डॉ. सुधा वर्मा आदि ने काव्यपाठ किया।
कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार एडवोकेट और अलका शर्मा ने किया। संयोजन प्रभुदत्त उपाध्याय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महामंत्री ओम स्वरूप गर्ग ने किया।
इस अवसर पर एसएन गर्ग, नीता गर्ग, कोषाध्यक्ष राजीव सिंघल, संगीता, चित्रकार प्रगति, नन्द किशोर, प्रदीप सिंघल, वन्दना बंसल, हुकम सिंह आदि उपस्थित रहे।