डीईआई में संगोष्ठीः कृषि अभियांत्रिकी में नवाचार और सतत विकास ही भविष्य की दिशा
आगरा। दयालबाग शैक्षणिक संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में देश के नामी वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कृषि अभियांत्रिकी में नवाचार और सतत विकास को भविष्य की अनिवार्यता बताया। संगोष्ठी में वर्टिकल फार्मिंग, जल संरक्षण रणनीतियां, जलवायु-अनुकूल बागवानी और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर गहन विमर्श हुआ।
यह संगोष्ठी दयालबाग शैक्षणिक संस्थान के स्कूल ऑफ एजुकेशन हॉल में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (आगरा स्थानीय केंद्र) के सहयोग से आयोजित की गई। विषय था- ‘ब्रिजिंग इनोवेशन एंड सस्टेनेबिलिटी इन एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग।’ यह कार्यक्रम इंजीनियरिंग संकाय द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा जगत, उद्योग जगत और छात्र समुदाय के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
पारंपरिक अंदाज़ में हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम का शुभारंभ पूरी तरह पारंपरिक विधि से हुआ। सर्वप्रथम सरस्वती पूजा और दीप प्रज्ज्वलन किया गया, तत्पश्चात विश्वविद्यालय की प्रार्थना के साथ औपचारिक शुरुआत हुई। इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रो. डी.के. चतुर्वेदी ने कार्यशाला का परिचय देते हुए अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
हरित क्रांति से लेकर वर्टिकल फार्मिंग तक
मुख्य अतिथि राधा स्वामी सत्संग सभा दयालबाग के अध्यक्ष जी.एस. सूद, ने हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत को खाद्य आत्मनिर्भर बनाने में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने वर्तमान कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-फसली प्रणाली और वर्टिकल फार्मिंग जैसे भविष्य की तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई।
सस्टेनेबिलिटी सबसे बड़ी चुनौती
विशिष्ट अतिथि अभियंता पुनीत चौधरी (महाप्रबंधक, कृषि पारिस्थितिकी सह सटीक खेती विभाग) ने सस्टेनेबिलिटी को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग और भूजल दोहन से होने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता जताई और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया।
प्रोफेशनल विकास और तकनीकी शिक्षा का महत्व
द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सचिव डॉ. अनुराग कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में प्रोफेशनल विकास और तकनीकी शिक्षा की अहमियत पर बल दिया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों को रेखांकित किया।
तकनीकी सत्र में हुए विशेषज्ञों के व्याख्यान
तकनीकी सत्रों में प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विचार रखे। डॉ. आनंद कृष्णन प्लापल्ली, प्रोफेसर, आईआईटी जोधपुर – भारत के ग्रामीण समुदायों के लिए मानव-केंद्रित जल संरक्षण रणनीतियां, पी.बी. स्वामी दास, एलुमनी डीईआई और हेड, डैनफॉस पावर सॉल्यूशन ने कृषि अभियांत्रिकी में औद्योगिक अवसर और चुनौतियां पर विचार रखे। डॉ. लॉर्ड अजय शर्मा, संस्थापक, एएसआर वेंचर्स ने कृषि प्रौद्योगिकी और उद्यमिता का महत्व, डॉ. उषा कलिनिंदी, सेवानिवृत्त प्रिंसिपल साइंटिस्ट, आईएआरआई ने जलवायु-अनुकूल बागवानी हेतु इंजीनियरिंग नवाचार पर व्याख्यान दिया।
आयोजन टीम का अहम योगदान
कृषि अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक यादव के नेतृत्व में समिति के सदस्य डॉ. अंजिता कृष्णा, डॉ. माधुरी दुबे, डॉ. प्रियंका गुंजन और इंजीनियर मुकेश कुमार सीतपाल ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
संगोष्ठी का समापन सभी वक्ताओं, आयोजन टीम और प्रतिभागियों के योगदान की सराहना करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया गया। कार्यक्रम ने कृषि अभियांत्रिकी में नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक नई सोच और प्रेरणा दी।