महाराष्ट्र विधान सभा में सनसनीखेज संघर्षः कल विधायकों में झड़प हुई थी, आज समर्थकों में हिंसक मारपीट
महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को दो विधायकों के समर्थकों के बीच मारपीट की शर्मनाक घटना ने राज्य की राजनीति में बढ़ती कटुता, असहिष्णुता और शिष्टाचारहीनता की स्पष्ट तस्वीर पेश की है। इससे न सिर्फ लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंची है, बल्कि आम जनमानस में भी असुरक्षा और अविश्वास की भावना उत्पन्न हुई है।
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा का परिसर गुरुवार को उस समय हंगामे और तनाव में तब्दील हो गया जब भाजपा विधायक गोपीचंद पडळकर और एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड के समर्थक आपस में भिड़ गए। यह झड़प इतनी उग्र हो गई कि विधान भवन की सीढ़ियां हाथापाई और गाली-गलौज का अखाड़ा बन गईं।
पुरानी रंजिश ने ली हिंसक रूप
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दो दिन पहले विधानसभा के भीतर दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसकी तपिश गुरुवार को खुलकर सामने आ गई। सुबह जैसे ही दोनों विधायकों के समर्थक आमने-सामने आए, पहले तो कहासुनी हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हुई और जल्द ही मामला हाथापाई और खुलेआम गाली-गलौज तक जा पहुंचा।
सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, कार्यवाही स्थगित
विधान भवन जैसे संवेदनशील स्थल पर हिंसा की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। झड़प के चलते कुछ देर के लिए विधानसभा की कार्यवाही भी रोकनी पड़ी। परिसर में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया था, जिससे नेताओं और कर्मियों में असहजता देखी गई।
आव्हाड का आरोप- गुंडे लाए गए थे विधान भवन में
एनसीपी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने इस घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, भाजपा सुनियोजित तरीके से अपने समर्थकों को विधान भवन के भीतर लाई और हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला करवाया। यह लोकतंत्र का अपमान है।
राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया
इस हिंसा पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) समेत कई विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक मंच पर इस प्रकार की गुंडागर्दी और असहनशीलता कैसे बढ़ रही है? कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे राजनीतिक शिष्टाचार का पतन करार देते हुए जांच की मांग की है।
विधायकों की आचार संहिता पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या जनप्रतिनिधियों के लिए विधान भवन में आचार संहिता और संयम जैसे मूल्य सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं? विधानसभा अध्यक्ष ने मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।