थलपति विजय सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, ईडी ऑफिसर घूसखोरी केस में सीजेआई की की दो टूक - जांच से रोक नहीं हटेगी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति सी जोसेफ विजय सरकार को सुप्रीम कोर्ट में बहुत बड़ी मायूसी हाथ लगी है। टीवीके सरकार ईडी ऑफिसर रिश्वत केस की राज्य की एजेंसी से जांच पर लगी रोक हटाने पहुंची थी, सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संकेत दिया कि तमिलनाडु के ईडी ऑफिसर रिश्वत कांड की जांच वह राज्य सरकार की एजेंसी से लेकर किसी सेंट्रल एजेंसी को सौंप सकता है। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने यह भी साफ कर दिया है कि जांच पर लगी रोक अभी वह नहीं हटा रहा। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि राज्य सरकार का ईडी ऑफिसर पर जिस तरह का आरोप है, उसपर विश्वास कौन करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी अंकित तिवारी से जुड़े घूसखोरी मामले की जांच को वह सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंप सकता है। लाइवलॉ की रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु के डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन की जांच पर सर्वोच्च अदालत जो रोक लगा रखी है, वह अभी लगी रहेगी। अदालत ने जांच से रोक हटाने की तमिलनाडु की सरकार की मांग ठुकरा दी है।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका देकर मांग की है कि ईडी अधिकारी अंकित तिवारी के खिलाफ रिश्वत केस की जांच तमिलनाडु की एजेंसी से लेकर सीबीआई को सौंप दी जाए। जनवरी, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की एफआईआर पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। तब तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके की सरकार थी।
गुरुवार को तमिलनाडु की थलपति सी जोसेफ विजय की टीवीके सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्णा कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राज्य सरकार ने एक आवेदन दिया है, जिसमें जांच पर लगी रोक हटाने की मांग की गई है। कुमार ने कहा, 'ईडी ऑफिसर के खिलाफ आगे की कार्रवाई रोक दी गई थी। हमने रोक हटाने की मांग की है।'
तमिलनाडु के एडिश्नल एडवोकेट जनरल पीसी सेन भी अपनी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और बेंच के सामने दलील दी कि ईडी के अधिकारी को 'रंगे हाथों' पकड़ा गया था, इसलिए जांच जरूरी था।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले की जांच इसके बदले किसी अन्य सेंट्रल एजेंसी को सौंपी जा सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'या हम इसकी जांच किसी सेंट्रल एजेंसी को सौंप दें।'
लेकिन, सीजेआई की बेंच ने साफ कर दिया कि अदालत को इस मामले में पहले दी गई अंतरिम राहत को हटाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- हम रोक नहीं हटाने जा रहे। हम मुख्य केस पर ही फैसला करेंगे।