आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में शर्मनाक कांड: वार्ड अटेंडेंट ने मरीजों को चिलम पिलाई
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की लापरवाही एक बार फिर बेनकाब हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने न केवल प्रशासन की नींद उड़ा दी, बल्कि व्यवस्था की पोल भी खोल दी है। वीडियो में तीन मानसिक रूप से बीमार मरीजों को वार्ड अटेंडेंट द्वारा चिलम पिलाते हुए देखा गया।
आगरा। उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की लापरवाही एक बार फिर बेनकाब हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने न केवल प्रशासन की नींद उड़ा दी, बल्कि व्यवस्था की पोल भी खोल दी है। वीडियो में तीन मानसिक रूप से बीमार मरीजों को वार्ड अटेंडेंट द्वारा चिलम पिलाते हुए देखा गया।
जांच में सामने आया कि यह शर्मनाक हरकत आउटसोर्स पर तैनात वार्ड अटेंडेंट हेमंत ने की थी। वजह बेहद चौंकाने वाली रही—हेमंत को मनपसंद ड्यूटी नहीं मिली, तो उसने वार्ड नंबर 20 में भर्ती मरीजों को कोने में ले जाकर चिलम दी और वीडियो बना डाला। उसी वीडियो को उसने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
लापरवाही की पराकाष्ठा
7 सितंबर को वायरल हुए इस वीडियो में साफ दिखा कि तीन मनोरोगी मरीज चिलम फूंक रहे हैं। जांच कमेटी (डॉ. ब्रजेश अग्रवाल, प्रो. अनिल कुमार सिसौदिया और डॉ. पार्थ सिंह बघेल के नेतृत्व में) ने पाया कि अटेंडेंट ने खुद बीड़ी तोड़कर चिलम में भरी और मरीजों को "धुंआ निकालो" कहकर उकसाया।
व्यवस्थागत विफलता
सबसे बड़ा सवाल यह है कि संस्थान की निगरानी व्यवस्था कहां थी? कैमरे और सुरक्षा होने के बावजूद कोई इस कृत्य को रोक नहीं सका। मानसिक रूप से बीमार मरीजों के साथ इस तरह का खिलवाड़ सीधे-सीधे अस्पताल प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है। अगर हेमंत को ड्यूटी पसंद नहीं थी, तो यह शिकायत का विषय था—लेकिन मरीजों को इस तरह के प्रयोग का हिस्सा बनाना न केवल अपराध है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर भी गहरी चोट है।
बर्खास्तगी के बाद भी उठे सवाल
जांच पूरी होने पर हेमंत को बर्खास्त कर दिया गया है। लेकिन यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह घटना अस्पताल की ढीली निगरानी, आउटसोर्सिंग व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े करती है।