आगरा पुलिस की शर्मनाक लापरवाही: अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल और नाबालिग की मौत के आरोपी को अछनेरा पुलिस ने छोड़ दिया
आगरा। आगरा के एक थाने की पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अछनेरा थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोरी के यौन उत्पीड़न, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल और अंततः उसे मौत के मुहाने तक पहुंचाने के आरोपी को पुलिस ने थाने से छोड़ दिया। आरोप है कि जिस मनचले की हरकतों से एक मासूम जान गंवा बैठी, उसे पुलिस ने डिजिटल सबूत देखने के बावजूद छोड़ दिया, जबकि परिजनों ने आरोपी को पकड़कर खुद पुलिस के हवाले किया था। मामला लखनऊ तक पहुंचने के बावजूद जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यह दर्दनाक घटना 22 जनवरी की बताई जा रही है। गांव कासौटी निवासी अक्षित जैन ने पहले नाबालिग किशोरी से दोस्ती की और बाद में उसके अर्धनग्न वीडियो व फोटो बना लिए। आरोप है कि इसके बाद वह लगातार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किशोरी को ब्लैकमेल करता रहा।
परिजनों के अनुसार, अक्षित जैन ने अपने साथियों अनिल (निवासी मई) और ललित जैन (निवासी कसौटी) सहित अन्य युवकों के साथ मिलकर किशोरी पर दबाव बनाया। निरंतर मानसिक प्रताड़ना से टूट चुकी किशोरी ने विषाक्त पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
सबूत मौजूद, फिर भी कार्रवाई नहीं
किशोरी के बाबा ने बताया कि 24 जनवरी को आरोपी अक्षित जैन के गांव आने पर उसे पकड़ लिया गया। उसकी तलाशी में दो मोबाइल फोन बरामद हुए, जिनमें दर्जनों आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और ऑडियो क्लिप मौजूद थीं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी व मोबाइल थाने ले गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मोबाइल में मौजूद वीडियो-फोटो खुद देखे, इसके बावजूद आरोपी को छोड़ दिया गया।
एफआईआर में देरी, परिवार दहशत में
पीड़ित परिवार का कहना है कि तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने खामियां बताकर कई बार थाने बुलाया। गंभीर अपराध और ठोस डिजिटल सबूतों के बावजूद पुलिस आरोपी का पक्ष लेती रही।
मौत के तीन दिन बाद, यानी 26 जनवरी की शाम को जाकर एफआईआर दर्ज की गई। देर से मुकदमा दर्ज होने के कारण पीड़ित परिवार और मामले से जुड़ी एक अन्य युवती भय और असुरक्षा में हैं।
पुलिस ने अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार करने की बात कही है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती, तो क्या एक नाबालिग की जान बच सकती थी?
इतने संवेदनशील और गंभीर अपराध के बावजूद किसी पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। यह मामला न केवल पुलिस की संवेदनहीनता को उजागर करता है, बल्कि नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले दावों की हकीकत भी सामने लाता है।