शिंदे-राज की नई जुगलबंदी: क्या बीएमसी चुनाव में बड़े धमाके की तैयारी?

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे की मुलाकात ने नई अटकलों को जन्म दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये नई जोड़ी क्या गुल खिलाने वाली है। माना जा रहा है कि ये दोनों नेता आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों को ध्यान में रखते हुए साथ आ रहे हैं।

Apr 17, 2025 - 13:26
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शिंदे-राज की नई जुगलबंदी: क्या बीएमसी चुनाव में बड़े धमाके की तैयारी?

क्या बीएमसी चुनावों के कारण बन रहा यह समीकरण?

बीते मंगलवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे से उनके दादर स्थित निवास 'शिवतीर्थ' पर मुलाकात की थी। शिंदे ने हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन यह बैठक बीएमसी चुनावों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो इस वर्ष होने की संभावना है।

उद्धव ठाकरे गुट पर संभावित असर

यदि एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे के बीच बीएमसी चुनाव के लिए गठबंधन होता है तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बता दें कि बीएमसी पर दशकों से शिवसेना का दबदबा चला आ रहा है। शिंदे और राज ठाकरे की उद्धव ठाकरे के इसी मजबूत किले पर नजर है। एमएनएस का समर्थन हासिल कर शिंदे गुट मराठी मतदाताओं में अपनी पैठ और बढ़ाना चाहता है।

महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित प्रभाव

मराठी वोट बैंक के ध्रुवीकरण के तहत राज ठाकरे की एमएनएस का मराठी अस्मिता पर जोर देने का इतिहास रहा है। यदि वे शिंदे के साथ आते हैं, तो मराठी मतदाताओं में उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा चेलैंज खड़ा हो सकता है।

भाजपा पहले से ही शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में है। यदि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी इस गठबंधन में शामिल हो जाती है, तो यह महायुति को बीएमसी चुनावों में मजबूत स्थिति में ला सकता है।

एमवीए के समक्ष बढ़ेंगी चुनौतियां

बता दें कि शिवसेना (उद्धव), कांग्रेस और एनसीपी की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन पहले से ही दबाव में है। यदि महायुति और मजबूत होती है, तो एमवीए को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की संभावित नजदीकी बीएमसी चुनावों के मद्देनजर एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जिसका उद्देश्य मराठी मतदाताओं को आकर्षित करना है। यह गठबंधन उद्धव ठाकरे गुट के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है और महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor