हनुमान की लंका दहन लीला और राम की शक्ति उपासना से गूंजा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव

आगरा। गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित बाबा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव के दसवें दिन बुधवार का मंचन अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक रहा। इस दिन की प्रमुख झांकियाँ और प्रसंग लंका दहन, समुद्र पर सेतु निर्माण और भगवान श्रीराम द्वारा शक्ति उपासना दर्शकों के बीच प्रस्तुत किए गए, जिनसे पूरा पंडाल जय जयकार और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

Oct 1, 2025 - 21:07
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हनुमान की लंका दहन लीला और राम की शक्ति उपासना से गूंजा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव
बाबा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव में लीला का मंचन करते स्वरूप।

आगरा। गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित बाबा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव के दसवें दिन बुधवार का मंचन अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक रहा। इस दिन की प्रमुख झांकियाँ और प्रसंग लंका दहन, समुद्र पर सेतु निर्माण और भगवान श्रीराम द्वारा शक्ति उपासना दर्शकों के बीच प्रस्तुत किए गए, जिनसे पूरा पंडाल जय जयकार और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

हनुमान जी की लंका यात्रा और वहां से माता सीता के संदेश लेकर लौटने से पूर्व किया गया लंका दहन प्रसंग मंच का मुख्य आकर्षण रहा। हनुमान जी की पूंछ में आग लगाकर राक्षसों द्वारा उपहास किए जाने के बाद जब उन्होंने सम्पूर्ण लंका को जला दिया, तो पूरा मंचन उत्साह और भक्ति से भर गया।

 “जग महं प्रगट भयो हनुमाना, लंका दहन कीन्हा बड़वाना॥”

इस दृश्य पर दर्शकों ने तालियों और जयकारों से हनुमान जी की वीरता का स्वागत किया। इसके बाद प्रस्तुत हुआ समुद्र पर सेतु निर्माण का प्रसंग। नल-नील की अगुवाई में वानर सेना द्वारा पत्थरों पर श्रीराम का नाम लिखकर उन्हें समुद्र में प्रवाहित करना और उनका तैरते हुए सेतु बन जाना अद्भुत दृश्य था। इस लीला ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि प्रभु के नाम में अनंत शक्ति है।

“राम नाम अंकित सिला, सागर बिच तिरै। भक्ति, श्रम, विश्वास से, धर्म मार्ग सिरजै॥”

अंतिम प्रसंग में भगवान श्रीराम द्वारा शक्ति उपासना का अद्भुत मंचन हुआ। देवी की आराधना और आशीर्वाद प्राप्त कर श्रीराम ने लंका विजय का संकल्प लिया। यह प्रसंग दर्शकों के लिए प्रेरणादायी और आध्यात्मिक रहा।

“शक्ति बिना नर नाहिं, करि सकई काज। राम सुमिरि भवानी, पायो विजय समाज॥

वृंदावन की किशोरी रास लीला मंडली के कलाकारों का जीवंत अभिनय सभी को मंत्रमुग्ध और भक्ति से ओतप्रोत कर रहा है।

लीला प्रसंग की व्याख्या करते हुए श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि हनुमान जी का पराक्रम, वानर सेना का सामूहिक श्रम और राम द्वारा की गई शक्ति उपासना हमें यह शिक्षा देती है कि सामूहिक प्रयास और दिव्य कृपा से कोई भी कार्य असंभव नहीं है।

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रामलीला के दसवें दिन के मंचन ने धर्म, शक्ति और सेवा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। यह प्रसंग जीवन के हर क्षेत्र में विश्वास और श्रम की महत्ता को रेखांकित करता है।

गुरुवार को युद्ध प्रसंग, रावण वध और शुक्रवार को श्रीराम के राज्याभिषेक जैसी महत्वपूर्ण लीलाओं का मंचन किया जाएगा।