छह साल जेल, फिर खुली पुलिस जांच की पोल, सुप्रीम कोर्ट ने निर्दोष को दिलाए ₹6 लाख

अछनेरा के वर्ष 2019 के हत्या-अपहरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस जांच की गंभीर खामियों पर नाराजगी जताते हुए अर्जुन उर्फ दीपक को राहत दी है। अदालत ने जली हुई हड्डियों की पहचान और डीएनए मिलान नहीं कराने तथा सीसीटीवी सहित अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। छह साल जेल में रहने के बाद राहत पाने वाले अर्जुन को उत्तर प्रदेश सरकार एक महीने में छह लाख रुपये मुआवजा देगी। देरी होने पर 18 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

Oct 27, 2026 - 00:26
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छह साल जेल, फिर खुली पुलिस जांच की पोल, सुप्रीम कोर्ट ने निर्दोष को दिलाए ₹6 लाख

अछनेरा के हत्या-अपहरण मामले में जांच की गंभीर खामियां उजागर, जली हुई हड्डियों की पहचान और डीएनए जांच नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, मुआवजा एक माह में देने का आदेश

आगरा-अछनेरा। अछनेरा थाने में वर्ष 2019 में दर्ज हत्या और अपहरण के एक मामले में पुलिस जांच की गंभीर खामियां सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में आरोपी रहे अर्जुन उर्फ दीपक को राहत देते हुए अदालत ने उसे बरी कर दिया। साथ ही, जांच में लापरवाही और गंभीर कमियों के कारण छह साल जेल में बिताने वाले अर्जुन को उत्तर प्रदेश सरकार से छह लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आपराधिक मामलों की जांच में वैज्ञानिक और विश्वसनीय साक्ष्यों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि कथित तौर पर बरामद जली हुई हड्डियों की पहचान और उनका डीएनए मिलान नहीं कराया गया। ऐसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परीक्षण के बिना ही जांच को आगे बढ़ाया गया, जिससे अभियोजन की कहानी और बरामद साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

जली हुई हड्डियों की पहचान और डीएनए जांच नहीं

मामले में पुलिस ने जिन अवशेषों और अन्य साक्ष्यों को जांच का आधार बनाया, उनकी वैज्ञानिक तरीके से पुष्टि नहीं कराई गई। विशेष रूप से जली हुई हड्डियों की पहचान तथा डीएनए परीक्षण नहीं कराया जाना जांच की बड़ी कमी के रूप में सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों की वैज्ञानिक पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध से जोड़ना उचित नहीं है।

सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों पर भी सवाल

मामले में प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाए। जांच एजेंसी द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों को जिस तरीके से एक-दूसरे से जोड़कर आरोपी के खिलाफ मामला तैयार किया गया, उसकी पर्याप्त विश्वसनीयता साबित नहीं हो सकी। अदालत ने जांच प्रक्रिया में बरती गई कमियों को गंभीरता से लिया और कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले आपराधिक मामले में जांच एजेंसी से अपेक्षा की जाती है कि वह निष्पक्ष, वैज्ञानिक और विश्वसनीय तरीके से साक्ष्य जुटाए।

छह साल जेल में रहने के बाद मिली बड़ी राहत

अर्जुन उर्फ दीपक को इस मामले में लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। बाद में मामले में उसके खिलाफ आरोपों को लेकर पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं पाए जाने पर उसे बरी कर दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उसे न केवल कानूनी राहत मिली है, बल्कि गलत और लापरवाह जांच के चलते लंबे समय तक जेल में रहने के लिए मुआवजा भी मिलेगा।

एक महीने में देना होगा छह लाख रुपये

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक महीने के भीतर छह लाख रुपये का मुआवजा अदा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो मुआवजे की राशि पर 18 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। इस आदेश से जांच में लापरवाही के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को हुई गंभीर क्षति के प्रति अदालत की सख्त संवेदनशीलता सामने आई है।

2019 के हत्या-अपहरण मामले से जुड़ा है प्रकरण

पूरा मामला अछनेरा थाने में वर्ष 2019 में दर्ज हत्या और अपहरण के मुकदमे से संबंधित है। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जांच की खामियां सामने आईं। अदालत के फैसले ने एक बार फिर आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य, निष्पक्ष जांच और पुलिस की जवाबदेही के महत्व को रेखांकित किया है।