बेटा रोता रहा, मां तड़पती रही और दरिंदगी हावी रही, आगरा में इंसानियत हुई शर्मसार
आगरा। किसी मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति पर हाथ उठाना सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि इंसानियत के मूल्यों पर सीधा हमला है। ताजनगरी में सामने आई यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है, जहां एक मंदबुद्धि युवक को सिर्फ पतंग उठाने की “गलती” पर बेरहमी से पीटा गया। यह मामला न केवल हिंसा का है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।
मंदबुद्धि युवक पर बर्बर हमला, मां ने लगाई न्याय की गुहार
आगरा। किसी मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति पर हाथ उठाना सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि इंसानियत के मूल्यों पर सीधा हमला है। ताजनगरी में सामने आई यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है, जहां एक मंदबुद्धि युवक को सिर्फ पतंग उठाने की “गलती” पर बेरहमी से पीटा गया। यह मामला न केवल हिंसा का है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।
घटना 27 दिसंबर की है। सुनीता देवी का बेटा, जो मानसिक रूप से कमजोर है, छत पर पतंग लेने गया था। उसे क्या पता था कि यह मासूम कोशिश उसके लिए दर्द और खौफ की वजह बन जाएगी। आरोप है कि पड़ोसी कुमकुम, पूजा, भारती और दिनेश, जो सभी चरण सिंह के परिवार के सदस्य हैं, घर में घुस आए और युवक को गिरा-गिराकर पीटने लगे। युवक की मानसिक स्थिति से भली-भांति परिचित होने के बावजूद किसी ने भी रहम नहीं किया।
बेटे की चीखें सुनकर मां सुनीता देवी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी और फरार हो गए। घायल बेटे की हालत देखकर मां का दिल टूट गया। आंखों से बहते आंसू और कांपती आवाज़ में मां बस यही सवाल कर पाईं, “मेरा बच्चा मंदबुद्धि है… उसे क्या पता किसकी पतंग है… क्यों उसे इतना मारा…?”
शिकायत में झलकता यह दर्द हर संवेदनशील इंसान को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज भी कमजोर और असहाय सुरक्षित हैं? मामले में थाना इंचार्ज निशामक त्यागी ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर युवक का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना समाज के सामने एक कड़वा सवाल छोड़ जाती है,क्या हम अब भी इतनी संवेदनशीलता नहीं रख पाए कि एक असहाय और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को इंसान की तरह देख सकें? कानून अपनी जगह है, लेकिन इंसानियत की जिम्मेदारी हम सबकी है।