म्यूनिक कांफ्रेंस में बोले जयशंकर,  बदली स्थिति में अमेरिका जानबूझ कर बना अकेली चाकत,  चीन दे रहा चुनौती

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 62वें म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने उभरती और मध्यम ताकतों को लेकर अपनी बात रखी। साथ ही अमेरिका-चीन का भी जिक्र किया।  

Oct 4, 2026 - 21:15
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म्यूनिक कांफ्रेंस में बोले जयशंकर,  बदली स्थिति में अमेरिका जानबूझ कर बना अकेली चाकत,  चीन दे रहा चुनौती


 
म्यूनिक।  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और चीन को लेकर बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका जानबूझकर अपनी मर्जी से अकेली ताकत बन रहा है। उन्होंने कहा है कि वॉशिंगटन की बदली हुई कंडीशन और चीन का उदय दुनिया में हालात बदल रहे हैं। जयशंकर 62वें म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, 'इंटरनेशनल सिस्टम अमेरिका और चीन के बीच होते कड़े कॉम्पिटिशन, उभरती और मिडियम पावर के बीच बढ़ती आत्मनिर्भरता और साझेदारियों में विविधता लाने और जोखिम कम करने की कोशिशों से तय हो रही है।'

उन्होंने अपने भाषण में कहा कि इस रूम में मौजूद कोई भी इस बात पर असहमति नहीं रखता होगा कि आज के हालात मुख्य रूप से अमेरिका की बदली हुई स्थिति से तय हो रहे हैं। अमेरिका जानबूझकर एक अकेली ताकत बन गया है।
 
जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा इंटरनेशनल कंडिशन का दूसरा बड़ा पहलू चीन का उदय है। दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग में उसकी हिस्सेदारी एक तिहाई है। साथ ही आर्थिक क्षमताएं राजनीतिक प्रभाव में बदल रही हैं। चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है। कई मायनों में यह उनकी अपनी सोच भी है। हकीकत भी है।
 
दुनिया अमेरिका और चीन के बीच एक कॉम्पिटिशन देख रही है। यह सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण किसी भी देश के पास मौजूद ताकत या प्रभाव का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है। यह कॉम्पिटिशन आपसी निर्भरता यानी डिपेंडेंस कॉम्पलेक्ससिटी के साथ-साथ चल रही है।

इसके अलावा विदेश मंत्री ने कहा कि उभरती और मध्यम आर्थिक शक्ति वाले देश अपने हित को लेकर जागरूक हो रहे हैं। वह ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भरता चाहते हैं। भारत में आत्मनिर्भर शब्द बहुत चलन में है। ये देश अब इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि बातचीत और मोलभाव में वे क्या योगदान दे सकते हैं।
 
जयशंकर ने कहा, 'ज्यादातर उभरती और मध्यम ताकतें अपनी इकोनॉमी और सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताओं से आगे बढ़कर अलग-अलग विकल्प अपनाने और जोखिम कम करने पर ध्यान दे रही हैं। वे एजेंडा के तहत सहयोग डेवलप कर रहे हैं। विचार की समानता की जरूरत नहीं रह गई है। उभरती और मध्यम ताकतें मजबूत सप्लाई चेन और नए सिस्टम डेवलप करने की दिशा में भी काम कर रही हैं।' 

इसके अलावा विदेश मंत्री ने कहा है कि साथ काम करने के लिए देशों को हर मुद्दे पर पूरी तरह सहमत होना जरूरी नहीं है। विचारों की पूरी समानता या हितों का मजबूत मेल होना आज के समय में बहुत ऊंचा पैमाना है। अगर देशों के बीच काफी हद तक समान आधार हो, तो वे साथ मिलकर काम कर सकते हैं। अगर आपके पास काफी समान बिंदु हैं, तो देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए यह काफी है।